अपने दामान-ए-शफ़ा’अत में छुपाए रखना मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

अपने दामान-ए-शफ़ा’अत में छुपाए रखना
मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखनाआप की याद से आबाद है दिल मेरा, हुज़ूर !
बंदा-परवर ! मेरी हस्ती को बसाए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

आप याद आएँ तो फिर याद न आए कोई
ग़ैर की याद मेरे दिल से भुलाए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

इसी मंसब का तलबगार हूँ मैं भी, आक़ा !
ख़ाक हूँ मैं, मुझे क़दमों से लगाए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

जब सवा नेज़े पे ख़ुर्शीद-ए-क़यामत होगा
अपनी ज़ुल्फ़ों के गुनहगार पे साए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

मैं ने माना कि निकम्मा हूँ, मगर आप का हूँ
मुझ निकम्मे को भी, सरकार ! निभाए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

उन के हो जाओ, हर इक चीज़ उन्हीं से माँगो
अपने दामन में न एहसान पराए रखना

मेरे सरकार ! मेरी बात बनाए रखना

शायद इस राह से, ख़ालिद ! मेरे आक़ा ग़ुज़रें
अपनी पलकों को सर-ए-राह बिछाए रखना

 

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