बुलालो फिर मुझे ऐ शाहे-बहरोबर मदीने में

बुलालो फिर मुझे ऐ शाहे-बहरोबर मदीने में

 

बुलालो फिर मुझे ऐ शाहे-बहरोबर मदीने में
मैं फिर रोता हुवा आऊं तेरे दर पर मदीने में

मैं पोहंचूं कूए जानां में गिरीबां चाक सीना चाक
गिरा दे काश मुझ को शौक़ तड़पा कर मदीने में

मदीने जाने वालो जाओ जाओ फी-अमानिल्लाह
कभी तो अपना भी लग जाएगा बिस्तर मदीने में

सलामे-शौक़ केहना हाजियो ! मेरा भी रो रो कर
तुम्हें आए नज़र जब रौज़ए-अन्वर मदीने में

पयामे-शौक़ लेते जाओ मेरा क़ाफ़िले वालो
सुनाना दास्ताने-ग़म मेरी रो कर मदीने में

मेरा ग़म भी तो देखो मैं पड़ा हूं दूर तयबा से
सुकूं पाएगा बस मेरा दिल-मुज़्तर मदीने में

न हो मायूस दीवानो पुकारे जाओ तुम उन को
बुलाएंगे तुम्हें भी एक दिन सरवर मदीने में

बुलालो हम ग़रीबों को बुलालो या रसूलल्लाह
पए शब्बीरो-शब्बर फ़ातिमा हैदर मदीने में

न दौलत दे न सरवत दे, मुझे बस ये सआदत दे
तेरे क़दमों में मर जाऊं मैं रो रो कर मदीने में

मदीना इस लिये अत्तार जानो-दिल से है प्यारा
के रेहते हैं मेरे आक़ा मेरे सरवर मदीने में

Leave a Comment

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.