मुस्तफ़ा मुस्तफ़ा (वो है मेरा नबी, वो है मेरा नबी)

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा
मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

सय्यिदुल-अव्वलीं, सय्यिदुल-आखरीं
वो है मेरा नबी, वो है मेरा नबी
तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

शाफ-ए-मुज़निबीं, ख़ातमुल-मुर्सलीं
वो है मेरा नबी, वो है मेरा नबी
तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

सब से पहले मशिय्यत के अनवार से
नक़्श-ए-रूहे-मुहम्मद बनाया गया
फिर उसी नक़्श से बाँट कर रौशनी
बज़्मे-कौनो-मकाँ को सजाया गया

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

रह़मते-दो-जहां, अह़मदे-मुस्तफ़ा
वो है मेरा नबी, वो है मेरा नबी
तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

सय्यिदुल-अम्बिया, सरवरे-असफिया
वो है मेरा नबी, वो है मेरा नबी
तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

वो मुह़म्मद भी, अह़मद भी, मह़मूद भी
हुस्ने-मुतलक़ का शाहिद भी, मशहूद भी
इल्मो-हिकमत में वो ग़ैर-महदूद भी
ज़ाहिरन उम्मियों में उठाया गया

मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा, मुस्तफ़ा

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