रज़ा हमारा है भरम

आ’ला हज़रत, आ’ला हज़रत
आ’ला हज़रत, आ’ला हज़रत

रज़ा हमारा है भरम, किसी से हम नहीं हैं कम
करे हमारा सर जो ख़म, नहीं किसी में इतना दम
हमें नहीं है कोई ग़म, चलाओ गोली, चाहे बम
कहेंगे फिर भी बा-ख़ुदा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा
रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

मसलके-रज़ा, हक़ की है सदा
हश्र तलक जारी रहे फैज़े रज़ा

नबी का जां निसार है, जलाल-ए-चार-यार है
कभी वो मिस्ले-प्यार है, कभी वो बर्क़-बार है
कलम में ऐसी धार है, अली की ज़ुल्फ़िक़ार है
ग़ज़ब में मूसवी असा, मेरा रज़ा मेरा रज़ा

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा
रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

अगर हुज़ूर हुक्म दें तो बे-ज़बान बोल दें
कभी क़मर को चीर दें, कभी वो शब को दिन करें
मेरे रसूले-पाक के हैं बे-शुमार मोजज़े
इन्हीं में एक मोजज़ा, मेरा रज़ा मेरा रज़ा

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा
रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

मसलके-रज़ा, हक़ की है सदा
हश्र तलक जारी रहे फैज़े रज़ा

बरेली की ज़मीन पर न पैदा होता वो अगर
भटक्ते हम इधर-उधर, ज़लील होते दर-ब-दर
ख़ुदा का हो गया करम, करम ने रख लिया भरम
हमारे बीच आ गया, मेरा रज़ा मेरा रज़ा

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा
रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

जो है अता-ए-किब्रिया, जो है रज़ा-ए-मुस्तफ़ा
वक़ारे-शाने-अवलिया, दिफ़ा-ए-शाने-अम्बिया
वो जिस के दर से मिल गया, हमें मदीने का पता
सभी का है वो पेशवा, मेरा रज़ा मेरा रज़ा

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा
रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा

मसलके-रज़ा, हक़ की है सदा
हश्र तलक जारी रहे फैज़े रज़ा

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