मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे सदा ग्यारहवीं हम मनाते रहेंगे

मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे सदा ग्यारहवीं हम मनाते रहेंगे ग्यारहवीं वाले ! मेरे ग्यारहवीं वाले ! ग्यारहवीं वाले ! मेरे ग्यारहवीं वाले ! इमदाद कुन, इमदाद कुन अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे सदा ग्यारहवीं हम मनाते रहेंगे नियाज़-ए-अक़ीदत दिलाते रहेंगे सदा …

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