मैं बंदा-ए-‘आसी हूँ ख़ता-कार हूँ मौला !

मैं बंदा-ए-‘आसी हूँ ख़ता-कार हूँ मौला !     मैं बंदा-ए-‘आसी हूँ, ख़ता-कार हूँ, मौला ! बे-नवाओं की नवा सुनता है इल्तिजा सब की ख़ुदा सुनता है हम के बंदे हैं सना करते हैं वो कि ख़ालिक़ है सदा सुनता है मैं बंदा-ए-‘आसी हूँ, ख़ता-कार हूँ, मौला ! लेकिन तेरी रहमत का तलबगार हूँ, मौला …

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