सरकार सुनते हैं

सरकार सुनते हैं जहां भी हो वहीं से दो सदा सरकार सुनते हैं सरे आईना सुनते हैं, पसे-दीवार सुनते हैं मेरा हर साँस उन की आहटों के साथ चलता है मेरे दिल के धड़कने की भी वो रफ़्तार सुनते हैं मैं सदक़े जाऊं उन की रह़मतुल-लिल-आ़लमीनी के पुकारो चाहे कितनी बार वो हर बार सुनते …

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