क़िब्ला-ए-बरकात हैं या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर

क़िब्ला-ए-बरकात हैं या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! क़ाज़ी-उल-हाजात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! क्या मेरी औक़ात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! आप की सब बात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर ! रोज़-ओ-शब यूँ लम्हा लम्हा आप के दरबार में नूर …

क़िब्ला-ए-बरकात हैं या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर Read More »