ज़मीं से अर्श-ए-आज़म तक नबी का बोल-बाला है

ज़मीं से अर्श-ए-आज़म तक नबी का बोल-बाला है ज़मीं से अर्श-ए-आज़म तक नबी का बोल-बाला है उन्हीं के फ़ैज़-ए-आली से जहाँ भर में उजाला है अ’दू शर्मा गया जब पढ़ दिया कंकर ने भी कलमा मेरे प्यारे नबी का मो’जिज़ा ये भी निराला है ज़मीं से अर्श-ए-आज़म तक नबी का बोल-बाला है उन्हीं के फ़ैज़-ए-आली …

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