Aashiq e Sarkar Haiñ Mere Raza Ahmad Raza
रज़ा रज़ा मेरे रज़ा
रज़ा रज़ा मेरे रज़ा
इमाम.. अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
जिस से रौशन हो गए क़ल्ब-ओ-जिगर हर इक नज़र
वो हसीं किरदार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
हज़रत-ए-ताजुश्शरीया जिनके हैं लख़्ते जिगर
वो बड़ी सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आज तक जिसकी बुलंदी को कोई ना छू सका
ऊंचा वो मीनार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
नज्द के ऐवान में है ख़ौफ़ जिसका आज भी
ह़क़ की वो ललकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
दास्तान-ए-इश्क़ है तहरीर जिसमें हर तरफ़
ऐसा इक अख़बार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़-ए-सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
लश्कर-ए-कुफ़्फ़ार से आसिम अकेले लड़ गए
कुफ़्र पर यलग़ार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
आशिक़े सरकार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
इश्क़ का मा’यार हैं मेरे रज़ा अहमद रज़ा
Manqabat Khwan: Syed Hassan Ullah Hussaini