HARA GUMBAD JO DEKHOGE ZAMANA BHOOL JAOGE NAAT LYRICS

HARA GUMBAD JO DEKHOGE ZAMANA BHOOL JAOGE NAAT LYRICS

 

Hara Gumbad Jo Dekhoge Zamana Bhool Jaoge
Agar Taiba ko Jaoge to Ana Bhool Jaoge

Hara Gumbad Jo Dekhoge Zamana Bhool Jaoge

Na itrao Ziada Chand taro Apni Rangat Par
Mere Aaqa Ko Dekhoge Chamakna Bhool Jaoge

Hara Gumbad Jo Dekhoge Zamana Bhool Jaoge

Agar Tum Jaanlo Ek Hafiz-E-Quran Ki Azmath
Tum Apnay Bachao ko English Padhana Bhool Jaoge –2

Agar Taiba Ko Jaoge Tu Ana Bhool Jaoge –1

Hadees-E-Mustafa Par Tum Jo Ho Jao Amal Paira
Qasam Allah Ki Maa ko Satana Bhool Jaoge

Agar Taiba Ko Jaoge Ana Bhool Jaoge –1

Agar tum jaanlo Ishq e sahaba (RA) ki haqeeqat ko
Toh apne jaisa aqa ko samjhna bhool jaoge.

Agar Taiba Ko Jaoge to Ana Bhool Jaoge

Agar Tum goar say Mere Nabi Ki Naat Sunloge
Mere Dawa Hai Tum Gaana Bajana Bhool Jaoge

Agar Taiba Ko Jaoge to Ana Bhool Jaoge

Tumare Samnay Huga Kabi Jab Gumbad-E-Qazra
Nazar Jam Jaige Usper Hatana Bhool Jaoge

Agar Taiba Ko Jaoge To Ana Bhool Jaoge

Submit By Tarik Hasan

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे

न इतराओ ज़्यादा चाँद तारो अपनी रंगत पर
मेरे आक़ा को देखोगे चमकना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे

अगर तुम गौर से मेरे नबी की नात सुन लोगे
मेरा दावा है तुम गाना-बजाना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे

तुम्हारे सामने होगा कभी जब गुम्बद-ए-ख़ज़रा
नज़र जम जाएगी उस पर, उठाना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे

हदीस-ए-मुस्तफ़ा पर तुम जो हो जाओ अमल-पैरा
क़सम अल्लाह की ! माँ को सताना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे

नात-ख़्वाँ:
यासिर सोहरवर्दी – हुदा सिस्टर्स – लाइबा फ़ातिमा

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हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

न इतराओ ज़्यादा चाँद तारो अपनी रंगत पर
रुख़-ए-सरवर के आगे जगमगाना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

नबी के दर की सूखी रोटियों में ऐसी लज़्ज़त है
शहंशाहों के दर का आब-ओ-दाना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

जो तुम ‘क़ुल इन्नमा’ की, मुन्किरो ! तफ़्सीर को पढ़ लो
तो अपने जैसा तुम उन को बताना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

हदीस-ए-मुस्तफ़ा पर तुम जो हो जाओ अमल-पैरा
क़सम अल्लाह की ! माँ को सताना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

कभी आ कर के देखो महफ़िल-ए-ना’त-ए-शह-ए-दीं में
तो मेरा दावा है गाना-बजाना भूल जाओगे

हरा गुम्बद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे
मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे

नात-ख़्वाँ:
अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी

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