Qurbani Ki Dua

Qurbani Ki Dua

 

 

Table of Contents
1 मुसलमान जानवरों की क़ुरबानी क्यों देते हैं?
2 Qurbani कब दिया जाता है?
3 कुर्बानी किस के लिए वाज़िब है?
4 कुर्बानी का जानवर कैसा होना चाहिए
5 जानवरों का क़ुरबानी करने के फायदे
6 जानवरों की क़ुरबानी देने का सुन्नत तरीका क्या है?
7 Qurbani Ki Dua in Arabic
8 Qurbani Ki Dua in Hindi Mein
9 Qurbani Ki Dua in English Mein
10 Qurbani Dua Turjuma In Hindi
11 Conclusion Point

Qurbani Karne Ki Dua In Hindi – क़ुरबानी, जिबह करने की दुआ तरीका

क्या आप Qurbani Karne Ki Dua जानना कहते हैं ?

तो आप बिलकुल सही जगह पर आए हैं, इस पोस्ट Qurbani Karne Ki Dua In Hindi, Roman Urud और Englishमें दी गई हैं।

साथ ही हम आप को क़ुरबानी की दुआ के साथ-साथ Zibah Karne Ka Tarika और Qurabi Ke Masial भी बताएंगे। जो हर मोमिन को जानना जरुरी हैं।

तो चलिए जानते हैं जानवर को हलाल तरीके की दुआतरीका और मसाइल

जरुरी जानकारी : यदि आप कोई दुआ या आयत पढ़ते हैं, तो अरबी भाषा में ही दुआ को पढ़ने की कोशिश करें। यहाँ हमने सिर्फ समझने के लिए Janwar Halal Karne Ki Dua Hindi, Urdu और Roman English Mai दी हैं, अगर दुआ में कुछ टाइपिंग में गलती हो तो मुझे माफ़ कर देना।

क़ुरबानी करते समय जानवर को कैसे रखे ?

जानवर को बाईं ओर इस तरह लिटाएं कि जानवर का मुँह क़िबला की तरफ हो। और दाहिने पैर उसके पहलू पर रखते हुए यह दुआ पढ़े –

कुर्बानी करने की दुआ – Qurbani Karne Ki Dua

 

कुर्बानी करने की दुआ – Qurbani Karne Ki Dua In Hindi

पहले की दुआ :

इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव व् मा अ न मिनल मुशरिकीन इन न सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन। ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अ न मिनल मुस्लिमीन। अल्लाहुम्मा ल क व मिन क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर।

ऊपर दी गई दुआ पढ़ या पढ़ने के फौरन बाद जानवर की जिबह करे और फिर निचे दी गई दुआ को पढ़े। 

 

बाद की दुआ :

अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम

नोट – अगर कुर्बानी आप के तरफ से है तो मिन्नी और अगर कुर्बानी दूसरे के तरफ से हो तो  मिन्नी की जगह मिन फला बोलो!  यानी उसका नाम लो!

यानी की, अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन ( अब जिसके नाम से क़ुरबी की जा रही हैं ‘मिन‘ के बाद उसका नाम ले ) कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम !

और अगर जानवर की कुर्बानी मिलबांट कर कर रहे हो मतलब अगर कुछ लोग एक साथ क़ुर्बानी कर रहे हैं – ऊंट, भैंस आदि, तो ‘मिन’ के बाद सब लोगो का नाम ले, जो इस क़ुरबानी में  शरीक हैं

नोट – अगर कुर्बानी के जानवर को अपने आप नहीं क़ुर्बान किया जा सकता है, तो उसे सुन्नी साहिहुल अकीदा से ही जिबह करवाएं! यदि किसी घटिया अकीदे और बेदीन आदि के जरिये यानि वहाबी से  कुर्बानी  के जानवर को जुबा  किया जाता है, तो अल्लाह के बारगाह में क़ुरबी क़ुबूल नहीं होंगी। और वो जानवर का गोश हलाल के जगह झटके का गोष कहलाएंगे।

Qurbani Karne Ki Dua In Roman Urdu/English

Qurbani Ki Pahli Ki Dua :

Inni wahhahtu wajhia lillazi fataras samawaati wl arz haneefa w ma ana minal mushrikeen inna salati w nusuki w mahyaya w mamati lillahi rabbil aalmeen la sharika lahu w bizalika umirtu w ana awwalul muslimeen allahumma la k wa min k bis millahi allahu akbar

Qurbani Ki Baad Ki Dua :

 

Allahumma taqabbalhu minni kama taqaballta min habibika muhammad sallallahu taala alaihi wasallam

 

कुर्बानी क्यू किया जाता है ?

कुरान-ए-करीम में दिया है कि कुर्बानी अल्लाह के पैगंबर हज़रत इब्राहिम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है।

हज़रत इब्राहिम अलैही असलम ने एक रात एक सपना देखा जिसमें अल्लाह तआला ने उन्हें अपनी सबसे बेशकीमती चीज अपने सबसे करीबी प्यारे को दान करने का आदेश दिया।

जिस व्यक्ति से वह बहुत प्यार करते है, उसे अल्लाह के रास्ते में जिब्हा करना है

जब हज़रत इब्राहिम अलैही सलाम नींद से जागे तो उन्होंने सबसे पहले सोचा, “मेरा सबसे प्यारा और सबसे अज़ीज़ क्या है?”

थोड़ा सोचने के बाद, इब्राहिम अलैही सलाम समझ गए  कि उनका इकलौता बेटा, इस्माइल अलैही सलाम , उनका सबसे प्यारा और सबसे अज़ीज़ बेटा था क्योंकि वह उससे बहुत प्यार करते थे ।

इब्राहिम अलैही सलाम के  इकलौते बेटे, इस्माइल अलैही असलम की कुर्बानी देने का फैसला अल्लाह ने इस उम्मीद के साथ किया था कि इब्राहिम अलैही सलाम क़ुबूल करेंगे ।

इब्राहिम अलैही सलाम के लिए, यह बहुत बड़ा इम्तेहान का समय था । एक तरफ उन्हें अपने प्यारे बेटे के लिए प्यार था, और दूसरी तरफ, उन्हें अल्लाह का हुकुम था।

हज़रात इस्माइल और दुंबा का वाक़िअ ?

Also read :Qurbani Karne Ki Dua In Hindi – क़ुरबानी, जिबह करने की दुआ तरीका

जब हज़रत इब्राहिम अलैही वसल्लम ने अपने प्रिय इस्माइल अलैही वसल्लम को समझाया कि तुम्हें अल्लाह के लिए जिबह करना है,

क्योंकि यह अल्लाह का आदेश है, इस्माइल अलैही सल्लम हस्ते और मुस्कुराते हुए अल्लाह के राह में क़ुर्बान होने के लिए तैयार हो गए ।

जब हज़रत इब्राहिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके बेटे इस्माइल अलैही वसल्लम अल्लाह की राह में जिबह करने निकले तो थोड़ी दूर चलने के बाद हज़रत इब्राहिम ने अपने बेटे को क़िबला रुख में लिटाया और उनके गले में छुरी चलाई

तो  फिर, अल्लाह तबारक ताअला ने आसमान से एक दुंबा को हज़रात इस्माइल अलैहि सलाम के जगह पर अपने करम से लिटा दिया और छुरी दुंबा के गर्दन पर चल गई ।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने फरमाया की ऐ इब्राहिम सलाम मई तुम्हारा इम्तेहामैं तुम्हारी परीक्षा लेना चाहता था, अल्लाह तआला ने टिप्पणी की।

और अल्लाह तआला ने इब्राहिम अलैही वा सल्लम को दुम्बा जिभा करने के लिए कहा, इसी तरह हज़रत इब्राहिम अलैही वा सल्लम जिन्होंने अल्लाह के लिए जुनून और प्यार दिखाया,

इसे देखकर, अल्लाह तबारक ताअला ने हर मुसलमान पर कुर्बानी को सुन्नत के क़यामत तक हुकुम दे दिया.

 

निष्कर्ष

उम्मीद हैं की आप को Qurbani Karne Ki Dua in Hindi और Roman Urdu और English में मालूम और समाज में आगया होंगे अगर क़ुरबानी करने की दुआ पर  आप का कोई प्रश्न या की प्रतिक्रिया हो तो आप हमें निचे commnet box में बता सकते हैं

और इस आर्टिकल को सवाब की नियत से हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर करे, अल्लाह हाफिज.

The dua (prayer) for Qurbani (the Islamic practice of sacrificing an animal) is as follows:

“Bismillah, Allahu Akbar” (In the name of Allah, Allah is the greatest).

This is recited before the actual sacrifice of the animal. It is important to note that Qurbani is only performed during the Islamic holiday of Eid al-Adha and is not a regular practice.

 

After reciting the above dua, the person performing the Qurbani should slaughter the animal with a sharp knife and with the intention of fulfilling their religious duty and seeking Allah’s forgiveness and blessings.

It is also recommended to recite the following dua during the Qurbani:

“Allahu Akbar, Allahu Akbar, La ilaha illallah, Allahu Akbar, Allahu Akbar, Wa Lillahil Hamd” (Allah is the Greatest, Allah is the Greatest, There is no god but Allah, Allah is the Greatest, Allah is the Greatest, and all praise is for Allah).

It is also recommended to give a portion of the meat from the Qurbani to the poor and needy, as it is considered a form of charity and a way to earn blessings from Allah.

 

It is also important to remember that Qurbani should be performed according to the guidelines and rules set by Islamic scholars and must be done in a humane and respectful manner. The animal should be treated kindly before the slaughter and should be killed quickly and with minimal suffering.

It is also recommended for the person performing the Qurbani to make dua for themselves, their family, and the Muslim Ummah before and after the slaughter.

Finally, It should be done only on the Eid al-Adha days and is not a regular practice. It is an act of worship that commemorates the sacrifice of Prophet Ibrahim (Abraham) and his willingness to sacrifice his son Isma’il (Ishmael) as an act of obedience to Allah.

 

Additionally, It is a Sunnah of Prophet Ibrahim (AS) and is a way for Muslims to follow his example and demonstrate their willingness to make sacrifices for the sake of Allah. It also serves as a reminder of the ultimate sacrifice that Prophet Ibrahim was willing to make and the ultimate sacrifice of Prophet Isa (AS) (Jesus). It is also an act of charity as it is recommended to distribute the meat among the poor and needy.

It is important to understand that Qurbani is not a requirement for all Muslims, but rather a voluntary act of worship that is only carried out by those who are financially able to do so. It is also important to remember that the act of Qurbani is not an end in itself, but rather a means to an end, which is to draw closer to Allah and to seek his forgiveness and blessings.

It is also important to note that it is recommended to perform Qurbani with one’s own money and not to take loans to do so. Also, it is recommended to perform it on the Eid days, the 10th, 11th, and 12th of Dhu al-Hijjah.

It’s also important to buy the animal from the market where the animals are treated well and it is also recommended to slaughter the animals by the person who is doing the Qurbani or by a Muslim who is trustworthy and knowledgeable about the Islamic rules of slaughtering.

It’s also worth mentioning that, Qurbani is not only limited to animals, it can also be performed by giving money to the poor and needy which is known as Udhiyah.

In conclusion, Qurbani is a voluntary act of worship that is performed during the Islamic holiday of Eid al-Adha as a commemoration of the sacrifice of Prophet Ibrahim and as a means to draw closer to Allah and seek his forgiveness and blessings. It should be done according to the guidelines set by Islamic scholars and in a humane and respectful manner.

 

The dua (prayer) for Qurbani (the Islamic practice of sacrificing an animal) can be divided into two parts: before and after the slaughter.

Before slaughter:

DuaTranslation
1Bismillah, Allahu AkbarIn the name of Allah, Allah is the greatest

After Slaughter:

DuaTranslation
2Allahu Akbar, Allahu Akbar, La ilaha illallah, Allahu Akbar, Allahu Akbar, Wa Lillahil HamdAllah is the Greatest, Allah is the Greatest, There is no god but Allah, Allah is the Greatest, Allah is the Greatest, and all praise is for Allah

It’s important to note that Qurbani is only performed during the Islamic holiday of Eid al-Adha and is not a regular practice. The animal should be treated kindly before the slaughter and should be killed quickly and with minimal suffering. It is also recommended to give a portion of the meat from the Qurbani to the poor and needy, as it is considered a form of charity and a way to earn blessings from Allah.

 

Qurbani Ki Dua in Arabic

 

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّماَوَاتِ وَالأَرْضَ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفَاً وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ . إِنَّ صَلاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ العَالَمِينَ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ المُسْلِمِينَ ، اللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ

I have turned my face to that Being who has created the skies and the Earth in the state of the Straight Deen of Ibrahim – and I am not amongst the Mushrikeen. Definitely, my Salaat, my Ibadat, and my living and dying are all for Allah, who is the Lord of the worlds, and who has no partner. I have been ordered (all that passed) I am amongst the Muslimeen (the obedient). O Allah this sacrifice is due to You granting us the ability to do so and it is for You

Qurbani Ki Dua in Arabic
Qurbani Ki Dua in Arabic

Qurbani Ki Dua in Hindi

 

क़ुरबानी की दुआ सही कैसे पढ़ें और क़ुरबानी सही तरीका क्या है? आज आपके पास बेहतरीन मौका जानने का है। मेरा सलाम कबूल करें।

जबह करने से पहले

اِنِّى وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِيْ فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيْفًا وَّمَا اَنَا مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ اِنَّ صَلاَتِيْ وَنُسُكِيْ وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِيْ للهِ رَبِّ الْعالَمِيْنَ لاَ شَرِيْكَ لَه وَبِذَلِكَ اُمِرْتَ وَاَنَا مِنَ الْمُسْلِمِيْنَ اَللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ

जबह करते वक्त

بِسْمِ اللهِ اَللهُ اَكْبرُ

जबह करने के बाद

اَللّهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّي كَمَاْ تَقَبَّلْتَ مِنْ حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَّخَلِيْلِكَ اِبْرَاهِيْمَ عَلَيهِمَا الصَّلوةُ وَالسَّلامُ

Reference : Arabic International Organisation.

कुर्बानी करने का तरीका
कुर्बानी के जानवर को पूरी आदाब व इज्ज़त के साथ क़िबला रुख के तरफ करके लेटाएं और यह दुआ पढ़े.

“إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ”.

जबह करने से पहले,

“اللّٰهُم َّمِنْكَ وَ لَكَ”

फिर

’’بسم اللہ اللہ اکبر‘‘

कह कर जबह कर दें

अगर आप अपने लिए कुर्बानी दे रहे हैं तो उसके बाद यह दुआ पढ़े

“اَللّٰهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّيْ كَمَا تَقَبَّلْتَ مِنِّيْ حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَ خَلِيْلِكَ إبْرَاهِيْمَ عليهما السلام”.

अगर आप किसी दूसरे लिए कुर्बानी कर रहे हैं तो उसके बाद यह दुआ पढ़े

“اَللّٰهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّيْ كَمَا تَقَبَّلْتَ مِنْ

(مِنْ) के बाद उस शख्स का नाम (साथ में वालिद का नाम) लें जिसके नाम पर कुर्बानी दिया जा रहा हो. उसके बाद आगे यह पढ़े.

حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَ خَلِيْلِكَ إبْرَاهِيْمَ عليهما السلام”.

इसके अलावा एक और दुआ है, जो नीचे लिखा गया है उसे भी आप पढ़ सकते हैं.

Qurbani Ki Dua in Hindi जैसे अल्फाजों से आप गूगल पर सर्च करते हैं। लेकिन क़ुरबानी करने के सभी सही जानकारी आपको हिंदी में नहीं मिल पाता होगा। इस लेख जरिए आपको जानकारी देने का कोशिश कर रहा हूं, बराय मेहरबानी आखिर तक ज़रूर देखें।

 

मुसलमान जानवरों की क़ुरबानी क्यों देते हैं?
कुरान शरीफ में आया है कि क़ुरबानी अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम की सुन्नत है। हजरत इब्राहिम ने अपने सपने देखा कि मैं इकलौते बेटे इस्माइल की क़ुरबानी अल्लाह की राह में कर रहा हूं। जब हज़रत इब्राहिम ने अपने बेटे को यह वाकया बताया तो, उसके बेटे इस्माइल खुशी-खुशी अल्लाह की राह में क़ुर्बान होने के लिए तैयार हो गये।

 

कुर्बानी की सही दुआ

 

हजरत इब्राहीम अपने बेटे के साथ अल्लाह की राह में कुर्बानी करने के लिए निकल गये। अपने बेटे को किब़ला रुख में लिटा कर उसकी गर्दन पर छोडी़ फेरी तो अल्लाह ताला ने आसमान से एक दुंबा भेजा। अल्लाह ने कहा कि ” ऐ इब्राहिम इसको (दुंबा) ज़िब्ह करो। हम तुम्हारा इम्तिहान लेना चाहते थे”।

जानिए ईद उल जुहा कब है?
अल्लाह को हज़रत इब्राहिम इस्माइल का यह यह शौक व ज़ज़्बा इतना पसंद आया कि क़यामत तक के लिए हम मुसलमानों के लिए कुर्बानी को सुन्नत कर दिया गया। हज़रत इब्राहिम के सुन्नत को जिंदा करने के लिए पूरी दुनिया के मुसलमान अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी देते हैं।

Qurbani कब दिया जाता है?
अल्लाह के हुक्म पर जानवरों की कुर्बानी देने का इस्लामिक कानून मदीना से शुरू हुआ था। जिसे पूरे दुनिया के मुसलमान मानते हैं।

इस्लामिक यानि हिजरी कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने धू-अल-हिज्जा की 10 से 12 तारीख को जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। जिसमें 3 दिनों का समय होता है। इन 3 दिनों में बक़रीद के नमाज़ के बाद कभी भी जानवरों की कुर्बानी दिया जा सकता है। इस इस्लामिक त्यौहार को ईद-उल-जुहा यानि बक़रीद कहते हैं।

दुनिया के जिस शहर या गांव में बक़रीद की नमाज़ होती है उन जगहों पर नमाज़ के बाद ही कुर्बानी दिया जा सकता है, तभी जायज़ होगा। अगर उस शहर या गांव में बक़रीद की नमाज़ नहीं होती हो तो उन जगहों पर सुबह से ही कुर्बानी दी जा सकती है।

कुर्बानी किस के लिए वाज़िब है?
कुर्बानी उन मुसलमान औरतों और मर्दों पर वाज़िब करार दिया गया है जिस पर ज़कात फर्ज़ है। जो ज्यादा मालदार है वह अपने पैगंबरों, माँ-बाप, दादा-दादी एवं एवं बच्चों के नाम पर भी दे सकता है।

कुर्बानी का जानवर कैसा होना चाहिए
दुंबा, बकरा और भेड़ जैसे छोटे जानवरों में सिर्फ एक आदमी के नाम से कुर्बानी दिया जा सकता है। जबकि गाय, बैल भैंस और ऊंट जैसे बड़े जानवरों में सात लोगों के नाम पर कुर्बानी दिया जा सकता है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि कुर्बानी के लिए जानवर का चुनाव कैसे करें। आपको बता दूं कि कुर्बानी के लिए जो भी जानवर खरीदे हैं। उसका तंदुरुस्त व बालिक होना जरूरी है।

जिस किसी जानवर का सींग जड़ से उखड़ चुका हो उसका कुर्बानी नहीं दिया जा सकता है। आंख या पैर से अपाहिज जानवरों का भी कुर्बानी सही नहीं माना जाता है।

कुर्बानी के जानवर खरीदने के बाद अगर उसमें कोई बड़ा ऐब निकल जाता हो तो मालदार आदमी के लिए इसकी कुर्बानी सही नहीं माना जाता है। जबकि गरीबों के लिए ठीक है।

कुर्बानी की जानवर खो जाए या मर जाए तो गरीब आदमी के लिए कुर्बानी कबूल हो जाती है। जबकि मालदार आदमी को दूसरा जानवर खरीदने का हिदायत किया जाता है। कुर्बानी का जानवर गुम गया हो लेकिन कुर्बानी के आखरी दिन भी मिल जाए तो उसका कुर्बानी करना लाज़मी है।

जानवरों का क़ुरबानी करने के फायदे
कुर्बानी क्या है इस प्रश्न का उत्तर है हज़रत इब्राहिम की सुन्नत है। कुर्बानी देने के क्या फायदे हैं इस प्रश्न का उत्तर – कुर्बानी के जानवर के हर बाल के बदले में एक नेकी मिलता है।

जानवरों की क़ुरबानी देने का सुन्नत तरीका क्या है?
कुर्बानी के जानवरों को कुर्बानी से पहले खूब अच्छे से खिलाना और पिलाना चाहिए व उसकी हिफ़ाज़त भी करनी चाहिए। कुर्बानी से पहले जानवर को पानी पिलाना चाहिए।

क़ुरबानी की दुआ व नीयत और तरीका – Qurbani ki Niyat

अपने नाम की कुर्बानी अपने हाथ से करना चाहिए। कुर्बानी से मुराद है कि ज़बह करना। अगर आप नहीं कर सकते हैं तो आप दूसरों से करवा सकते हैं। कुर्बानी के समय जानवर के पास रहना अफ़जल व बेहतर माना जाता है।

कुर्बानी से पहले जानवर को अच्छी तरह से बांध दें और उसको किबला की तरफ मुंह करके लेटा दें। कुर्बानी के लिए पहले छोड़े को खूब तेज़ कर लें। ज़बह करने वाले भी अपने आप को किबला रुख कर लें और यह दुआ पढ़ें।

Qurbani Ki Dua in Arabic
إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ، بِسْمِ الله الله أَكْبَرُ।

Qurbani Ki Dua in Hindi Mein
इन्नी वज्जह्तु वज्हि-य लिल्लज़ी फ़-त-रस्समावाति वल अर-ज़ अला मिल्लति इब्राही- म हनीफ़ंव व मा अना मिनल मुश्रिकीन इन-न सलाती व नुसुकी व महया-य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आ ल मी न ला शरी-क लहू व बि ज़ालि-क उमिर्तु व अना मिनल मुस्लिमीन अल्लाहुम-म मिन-क व ल-क अन ० बिस्मिल्लाह वल्लाहू अकबर।

 

Qurbani Ki Dua in English Mein

 

Inni waz jahtu wajahi ya lillazi fa ta rassamawati wal arz hanifauv wa ma ana minal mushriqi na in na salaati wa nusuki wa mahya ya wa mamaati lillahi rabbil aalmin। La shariq lahu wa bizali ka uriratu wa ana minal muslimin। Allahumma ma la ka wa min ka bismillahi Allahu Akbar।

Qurbani Dua Turjuma In Hindi
मैंने उस ज़ात की तरफ़ अपना रुख मोड़ा जिसने आसमानों को और जमीनों को पैदा किया, इस हाल में में इब्राहीम में हनीफ़ के दीन पर हूं और मुश्रिको में से नहीं हूँ।

बेशक मेरी नमाज़ और मेरी इबादत और मेरा मरना और जीना सब अल्लाह के लिए है जो रब्बुल आलमीन है, जिसका कोई शरीक नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं फरमाबरदारों में से हूं। ऐ अल्लाह, यह कुर्बानी तेरी तौफ़ीक़ से है और तेरे लिए है।

दुआ पढ़ने के बाद,

दुआ के आखिर में अन है और अन के बाद उसका नाम लें, जिसके तरफ से कुर्बानी दिया जा रहा हो और अगर आप अपने तरफ से ज़िब्ह कर रहे हो तो अपना नाम लें । इसके बाद बिस्मिल्लाह वल्लाहू अकबर कह कर ज़िब्ह कर लें ।

कुर्बानी देने के बाद,

क़ुरबानी की दुआ इन हिंदी

कुर्बानी के जानवर को ज़िब्ह करने के बाद यह दुआ पढ़ें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपने, अपने नाम से कुर्बानी दिया है तो अल्लाहुम्म तक़ब्बल के बाद मिन्नी पढ़ें। अगर आप दूसरों के लिए कुर्बानी का जानवर ज़बह किया है तो मिन्नी के जगह ‘मिन फलां’ पढ़ें। फलां यानी कुर्बानी देने वाले का नाम के वालिद का नाम भी शामिल करें।

अल्लाहुम्म तक़ब्बल मिन्नी (‘मिन फलां’) कमा तक़ब्बल्त मिन् ख़लीलिक इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम

 

क़ुरबानी के बाद, गोश्त का तक्सीम कैसे करना चाहिए

 

बड़े जानवरों में सात हिस्सा होता है, अगर अलग-अलग लोगों ने हिस्सेदारी क्या हो तो बेहतर है कि गोश्त का बंटवारे में तराजू का इस्तेमाल किया जाए।

अपने हिस्से का गोश्त पाने के बाद, उसे तराजू से तीन भागों में बांटे। जिस में ध्यान रखें कि पहला हिस्सा आपके घर वालों के लिए है, दूसरा हिस्सा आपके दोस्तों के लिए है । जबकि तीसरा हिस्सा गरीबों के लिए है।

कुर्बानी का गोश्त बेचना हराम करार दिया गया है । यहां तक कहा गया है। अगर कोई कसाई को जब़ह करने के बदले मजदूरी में गोश्त मांगता हो तो यह सही नहीं माना गया है।

Conclusion Point
कुर्बानी के जानवरों का चमरा बेचकर सदक़का करना जरूरी है। चमरा किसी मदरसे या एनजीओ दिया जा सकता है बशर्ते कि वह संस्था ग़रीबों का मददगार हो। कुर्बानी की दुआ इन हिंदी से संबंधित आर्टिकल आप को पसंद आया होगाा।

उम्मीद करता हूं कि आपको Qurbani Ki Dua in Hindi और कुर्बानी करने का इस्लामिक तरीका आपको पसंद आया होगा.

 

 

Qurbani Ki Dua 11 points

The dua (prayer) for Qurbani (the Islamic practice of sacrificing an animal) can be divided into 11 points:

  1. Begin by reciting the tasmiyah (the declaration of the name of Allah): “Bismillah, Allahu Akbar” (In the name of Allah, Allah is the greatest)
  2. Make the intention of performing Qurbani in the name of Allah
  3. Praise Allah and send blessings upon the Prophet Muhammad (peace be upon him)
  4. Recite the following verse from the Quran: “In the name of Allah, and Allah is the Most Great” (Surah al-Baqarah, verse 198)
  5. Recite the following dua: “Allahu Akbar” (Allah is the Greatest)
  6. Recite the following dua: “La ilaha illallah” (There is no god but Allah)
  7. Recite the following dua: “Allahu Akbar” (Allah is the Greatest)
  8. Recite the following dua: “Allahu Akbar” (Allah is the Greatest)
  9. Recite the following dua: “Wa Lillahil Hamd” (and all praise is for Allah)
  10. Pray for yourself, your family and the Muslim Ummah
  11. Slaughter the animal with the intention of fulfilling your religious duty and seeking Allah’s forgiveness and blessings

It is important to note that Qurbani is only performed during the Islamic holiday of Eid al-Adha and is not a regular practice. It should be done according to the guidelines set by Islamic scholars and in a humane and respectful manner.

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