Taweez e Hasan Lyrics – Mesum Abbas

Taweez e Hasan Lyrics – Mesum Abbas

 

 

हाय हसन, हाय हुसैन
हाय हसन, हाय हुसैन

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

ख़त भाई का पढ़ कर रोए
दिल दर्द से थर्राया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

इक पल के लिए नज़रों में फिरा
भाई की शहादत का मन्ज़र !!
क्या बैन किए थे बहनों ने
था तश्त में टुकड़े-टुकड़े जिगर !!
क़ासिम का कहीं ये हाल न हो
इस बात ने तड़पाया !!

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

तहरीर में शब्बर ने ये कहा
तस्कीन ए मोहब्बत दे देना !!
मक़लत की इजाज़त जब मांगे
क़ासिम को इजाज़त दे देना !!
तब नोहा किया और क़ासिम को
सीने से लिपटाया !!

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

ख़त पढ़ के इजाज़त दी शह ने
हथ्यार सजाए क़ासिम ने !!
तलवार लगाकर पटके में
जौहर वो दिखाए क़ासिम ने !!
सदक़ा जो उतारा ज़ैनब ने
दिल शाह का भर आया !!

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

घोड़े से गिरा जब इब्ने हसन
मौला को को पुकारा वा-वैला
पहुंचे जो शहे दीं मक़तल में
पामाल बदन था क़ासिम का
भाई के पिसर को मौला ने
इस हाल में जब पाया

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

फिर अपनी अबा के दामन में
क़ासिम को समेटा मौला ने !!
किस तरहं उठाऊं ये लाशा
ग़ाज़ी को पुकारा मौला ने !!
क़ासिम का सरापा टुकड़ों में
तक़दीर ने दिखलाया !!

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

ख़ैमे में ज्यूं ही लाये लाशा
सर अहले हरम ने पीट लिया
फिज़्ज़ा ने कलेजा थाम लिया
ज़ैनब के लबों पर नोहा था
फ़रवा की तरफ़ देखा शह ने
आंखों में लहू आया

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

 

मीसम वो क़यामत का मन्ज़र
तहरीर में लाया है मज़हर
गठरी को ज्यूं ही खोला शह ने
सादात हुए फिर ख़ाक बसर
अश्कों को अली का बेटा भी
तब रोक नहीं पाया

भाई को भाई याद आया

 

ताबीज़ ए हसन जब क़ासिम ने
शब्बीर को दिखलाया

भाई को भाई याद आया
भाई को भाई याद आया

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