Ayatul Kursi in Hindi

Ayatul Kursi in Hindi

 

 

आयतल कुर्सी हिंदी में | Ayatul Kursi-In Hindi

अस्सलामु अलइकुम व रहमतुल्लाह
नाज़रीन इस पोस्ट में हम आपके के लिए

Ayatul Kursi | Arabic | English | Hindi | Bangla, में तर्जमा के साथ पेश की गई है,

नोट:

मखारिज सही अदा न होने की वजह पर उलमा ए अहले सुन्नत क़ुरआन ए पाक या Ayatul Kursi को अरबी में पढ़ने का हुक्म देते है,
इसलिए तमाम उम्मत ए मुस्लिमा से गुजारिश है की कोशिश ये करे की क़ुरान ए पाक या Ayatul Kursi को अरबी में पढ़े
अगर किसी को कुरआन ए पाक या Ayatul Kursi नही पढ़ना आता है तो मजबूरन वो: पढ़े
लेकिन वो: याद करके किसी हाफिज ए कुरआन या का़री ए कुरआन को सुनाए ताकी
वो सही मखारिज के साथ आपको पढ़ा सके,

इस्लामिक सवाल जवाब / Islamic Sawal Jawab

ayatul kursi’in hindi / आयतुल कुर्सी हिंदी में

Ayatul kursi’in hindi

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू, अल हय्युल क़य्यूम,
ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नउम,
लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़,
मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इज़निह,
यअलमु मा ब्इ’न अयदीहिम वमा खल्फहुम
वला युहीतूना बिशइ इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ
वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़,
वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्यिल आज़ीम,

ayatul kursi’meaning in hindi / आयतुल कुर्सी हिन्दी में तर्जमा
क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

Ayatul Kursi’benefits / आयतुल कुर्सी की फजीलत
(1) हदीस शरीफ़ में है कि यह आयत Ayatul Kursi कुरआन ए पाक की आयतों में बहुत ही अज़मत वाली आयत है,|

(2)हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब رضي الله عنه से रिवायत है ,
कि हुस्ने अख़्लाक़ के पैकर, नबियों के ताजवर, महबूबे रब्बे ﷻ हुजूर ﷺ ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर ! क्या
तुम्हें मालूम है कि कुरआने पाक की जो आयतें तुम्हें याद हैं उन मेँ कोनसी आयत अजीम है ?
मैंने अर्ज़ किया – अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल क़य्यूमु
फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने मेरे सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया ऐ अबू मुन्सिर तुम्हें इल्म मुबारक हो,|

(3) मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

(4) अमीरुल मुअमिनीन हज़रते अली رضي الله عنه फ़रमाते हैँ कि मैंने नूर के पैकर,
तमाम नबियों के सरवर, दो जहां के ताज़वर, हुजूर ﷺ को मिम्बर पर फ़रमाते हुए सुना
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढे उसे हैं ज़न्नत में दाखिल होने से मौत के सिवा
कोई चीज़ नहीं रोकती ! और जो कोई रात को सोते वक़्त इसे पढेगा ! अल्लाहु ﷻ उसे, उस के घर को
और उसके आस पास के घरों को महफूज फ़रमा देगा
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढेगा.
उस को हस्बे जैल बरकतें नसीब होंगी,|

(5) वोह मरने के बाद जन्नत में जाएगा ! इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(6) वोह शैतान और जिन की तमाम शरारतों से महफ़ूज़ रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(7) अगर मोहताज होगा तो चन्द दिनों मेँ उस की मोहताजी और ग़रीबी दूर हो जाएगी । इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(8) जो शख्स सुबह व शाम और बिस्तर पर लेटते वक़्त
आयतल कुर्सी Ayatul Kursi और इस के बाद की दो आयतें ख़ालिदून तक पढा करेगा वोह चोरी,
गर्क आबी (पानी में डूबने) और जलने से महफूज रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(9) अगर सारे मकान में किसी ऊंची जगह पर Ayatul Kursi लिख दी जाए
जिस पर हर किसी की नज़र पढ़ती हो इंशाअल्लाह ﷻ ! उस घर में कभी फ़ाक़ा न होगा बल्कि
रोजी में ब-र-कत और इज़ाफ़ा होगा ! औंर उस मकान में कभी चोर ना आएगा,,,

(10) हजरत माकल बिन यासर رضي الله عنه का बयान है कि
जो शख्स तीन बार Ayatul Kursi पढ़ता हो उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को
( मुकर्रर ) फरमा देगा. जो शाम तक उस पर रहमत भेजते रहेगें.
अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मरेगा.
जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी.
वह सुबह तक वह रहमत भेजते रहेगे |

 

ayatul kursi’arabic

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ
لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ
لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ
مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ
وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ
وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ
وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا
وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

 

Ayatul Kursi’meaning In Urdu

 

اللہ ہے جس کے سوا کوئی معبود نہیں وہ آپ زندہ اور اوروں
کا قائم رکھنے والا اسے نہ اونگھ آئے نہ نیند اسی کا ہے جو کچھ آسمانوں میں ہے
اور جو کچھ زمین میں وہ کون ہے جو اس کے یہاں سفارش کرے بغیر اس کے حکم کے جانتا ہے
جو کچھ ان کے آگے ہے اور جو کچھ ان کے پیچھے اور وہ نہیں پاتے
اس کے علم میں سے مگر جتنا وہ چاہے اس کی کرسی میں سمائے ہوئے
آسمان اور زمین اور اسے بھاری نہیں ان کی نگہبانی اور وہی ہے بلند بڑائی والا

क़यामत की निशानिया ; क़ुरआन ओर हदीस के हवाले के साथ

 

ayatul kursi’bangla | text

আল্লা-হু লাইলা-হা ইল্লা-হুওয়া আল হাইয়ুল কাইয়ূমু লা-তা’
খুযুহূ ছিনাতুওঁ ওয়ালা-নাঊম লাহূ মা-ফিছ ছামা-ওয়া-তি ওয়ামা-ফিল আরদি মান যাল্লাযী ইয়াশফা‘
উ ‘ইনদাহূইল্লা-বিইযনিহী ইয়া‘
লামুমা-বাইনা আইদীহিম ওয়ামা-খালফাহুম ওয়ালা-ইউহীতূনা বিশাইইম মিন ‘
ইলমিহীইল্লা-বিমা-শাআ ওয়াছি‘
আ কুরছিইয়ুহুছ ছামা-ওয়া-তি ওয়াল আরদা ওয়ালা-ইয়াঊদুহু হিফজু হুমা-ওয়া হুওয়াল ‘
আলিইয়ূল ‘আজীম।

 

ayatul kursi’bangla | turjuma

 

আল্লাহ্‌ হন, যিনি ব্যতীত অন্য কোন উপাস্য নেই। তিনি নিজে জীবিত এবং
অন্যান্যাদের অধিষ্ঠিত রাখেন। তাঁকে না তন্দ্রা স্পর্শ করে, না নিদ্রা। তাঁরই, যা কিছু
আস্‌মানসমূহে রয়েছে এবং যা কিছু যমীনে। সে কে, যে তাঁর সম্মুখে সুপারিশ করবে,
তাঁর অনুমতি ব্যতিরেকে? (তিনি) জানেন যা কিছু তাদের সম্মুখে রয়েছে এবং যা কিছু তাদের
পেছনে। আর তারা পায়না তাঁর জ্ঞান থেকে, কিন্তু যতটুকু তিনি চান। তাঁর ‘কুরসী’
আস্‌মানসমূহ ও যমীন ব্যাপী এবং তাঁর জন্য ভারী নয় এগুলোর রক্ষণাবেক্ষণ। আর তিনিই হন উচ্চ,
মহা মর্যাদাসম্পন্ন।

5 वक़्त की नमाजों में कितनी कितनी रकअतें है जानिए- नमाज़ की नियत भी

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ayatul kursi english | text
Bismillahir-Rahmanir-Raheem,

Allahu La Ilaaha Illaa Huwal Haiyul Qayyoom;
Laa Ta’akhuzuhoo Sinatunw Wala Nawm;
Lahoo Maa Fis’samaawaati Wamaa Fil Arz;
Man Zallazee Yashfa’u ‘Inda’hooo Illaa Bi Iznih;
Ya’lamu Maa Baina Aideehim Wamaa Khalfahum;
Walaa Yuheetoona Beshai Im’min ‘Ilmihee Illa Bimaa Shaaa;
Wasi’a Kursiyyuhus Samaa-Waati Wal-Arz;
Wala Ya’ooduho Hifzuhumaa; Wa-Huwal ‘Aliyyul ‘Azeem,

 

आयतल कुर्सी के फायदे

(1) हदीस शरीफ़ में है कि यह आयत Ayatul Kursi कुरआन ए पाक की आयतों में बहुत ही अज़मत वाली आयत है,|
(2)हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब رضي الله عنه से रिवायत है ,
कि हुस्ने अख़्लाक़ के पैकर, नबियों के ताजवर, महबूबे रब्बे ﷻ हुजूर ﷺ ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर ! क्या
तुम्हें मालूम है कि कुरआने पाक की जो आयतें तुम्हें याद हैं उन मेँ कोनसी आयत अजीम है ?
मैंने अर्ज़ किया – अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल क़य्यूमु
फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने मेरे सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया ऐ अबू मुन्सिर तुम्हें इल्म मुबारक हो,|

(3) मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

(4) अमीरुल मुअमिनीन हज़रते अली رضي الله عنه फ़रमाते हैँ कि मैंने नूर के पैकर,
तमाम नबियों के सरवर, दो जहां के ताज़वर, हुजूर ﷺ को मिम्बर पर फ़रमाते हुए सुना
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढे उसे हैं ज़न्नत में दाखिल होने से मौत के सिवा
कोई चीज़ नहीं रोकती ! और जो कोई रात को सोते वक़्त इसे पढेगा ! अल्लाहु ﷻ उसे, उस के घर को
और उसके आस पास के घरों को महफूज फ़रमा देगा
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढेगा.
उस को हस्बे जैल बरकतें नसीब होंगी,|

(5) वोह मरने के बाद जन्नत में जाएगा ! इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(6) वोह शैतान और जिन की तमाम शरारतों से महफ़ूज़ रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(7) अगर मोहताज होगा तो चन्द दिनों मेँ उस की मोहताजी और ग़रीबी दूर हो जाएगी । इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(8) जो शख्स सुबह व शाम और बिस्तर पर लेटते वक़्त
आयतल कुर्सी Ayatul Kursi और इस के बाद की दो आयतें ख़ालिदून तक पढा करेगा वोह चोरी,
गर्क आबी (पानी में डूबने) और जलने से महफूज रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(9) अगर सारे मकान में किसी ऊंची जगह पर Ayatul Kursi लिख दी जाए
जिस पर हर किसी की नज़र पढ़ती हो इंशाअल्लाह ﷻ ! उस घर में कभी फ़ाक़ा न होगा बल्कि
रोजी में ब-र-कत और इज़ाफ़ा होगा ! औंर उस मकान में कभी चोर ना आएगा,,,

(10) हजरत माकल बिन यासर رضي الله عنه का बयान है कि
जो शख्स तीन बार Ayatul Kursi पढ़ता हो उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को
( मुकर्रर ) फरमा देगा. जो शाम तक उस पर रहमत भेजते रहेगें.
अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मरेगा.
जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी.
वह सुबह तक वह रहमत भेजते रहेगे |

आयतल कुर्सी का तर्जुमा हिंदी में

क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

 

आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत

आयतुल कुर्सी कुरान की सब से अज़ीम तरीन आयत है हदीस में रसूल स.अ. ने इसको तमाम आयात से अफजल फ़रमाया है।
हज़रत अबू हुरैरा र.अ. फरमाते हैं कि रसूल स.अ. ने फ़रमाया : सूरह बकरा में एक आयत है जो तमाम कुरान की आयातों की सरदार है जिस घर में पढ़ी जाये शैतान वहां से निकल जाता है।

आयतुल कुर्सी की ख़ासियत
इस सूरत में अल्लाह की तौहीद ( अल्लाह को एक मानना ) को साफ़ तौर पर बताया गया है और शिर्क को रद किया है |

इस आयत में 10 जुमले ( Sentences ) हैं
पहला जुमला : (अल्लाह जिसके सिवा कोई माबूद नहीं)
इस में अल्लाह इसमें ज़ात है जिस के मानी हैं वो ज़ात जिस के अन्दर तमाम कमाल पाए जाते हों और तमाम बुराइयों से पाक हो और उस के सिवा कोई माबूद नहीं।

दूसरा जुमला : (वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है )
हय्य के मानी अरबी ज़ुबान में जिसको कभी मौत न आये हमेशा जिंदा रहने वाला और कय्यूम के मानी हैं जो खुद कायम रहे और दूसरों को भी कायम रखता और संभालता हो और कय्यूम अल्लाह तआला की ख़ास सिफत है जिस में कोई भी उस का शरीक नहीं क्यूंकि जो चीज़ें अपने बाक़ी रहने में दुसरे की मोहताज हों वो किसी दुसरे को क्या संभाल सकती हैं।

इसलिए किसी इंसान को क़य्यूम कहना जाएज़ नहीं बल्कि अब्दुल कय्यूम ( कय्यूम का बंदा ) कहना चाहिए जो लोग अब्दुल कय्यूम की जगह सिर्फ कय्यूम बोलते हैं गुनाहगार होते हैं।

तीसरा जुमला : (न उसको ऊंघ आती है न नींद)
अल्लाह के सहारे ही सारी कायनात कायम है इसलिए एक आम इंसान का ख़याल इस तरफ जा सकता है कि जो ज़ात इतना बड़ा काम कर रही है उसे भी किसी वक़्त थकान होना चाहिए और कोई वक़्त आराम और नींद के लिए चाहिए लेकिन इस जुमले में महदूद और अदना सा इल्म रखने वाले इंसान को बता दिया गया कि अल्लाह को अपने जैसा न समझे उसकी कुदरत के सामने ये काम कुछ मुश्किल नहीं और उस की ज़ात नींद और थकान से बरी है।

चौथा जुमला : (जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है)
जिसका मतलब है तमाम चीज़ें जो ज़मीन और आसमान में हैं सब अल्लाह की ही मिलकियत में हैं वो जिस तरह चाहे उस में तसर्रुफ़ करे |

पांचवां जुमला : (कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके)
मतलब ऐसा कौन है जो उस के आगे किसी की सिफारिश कर सके हाँ कुछ अल्लाह के मकबूल बन्दे हैं जिनको ख़ास तौर पर बात करने की और शिफारिश की इजाज़त दी जाएगी लेकिन बगैर इजाज़त के कोई सिफारिश नहीं कर सकता |

छठा जुमला : (वो उसे भी जनता है जो मख्लूकात के सामने है और उसे भी जो उन से ओझल है)
यानी अल्लाह उन लोगों के आगे पीछे के तमाम हालात जानता है और आगे पीछे का मतलब ये हो सकता है कि उनके पैदा होने के पहले और पैदा होने के बाद के हालत अल्लाह जानता है और इसका मतलब ये भी हो सकता है कि वो हालात जो इंसान के सामने हैं खुले हुए है और पीछे का मतलब वो हालात जो छुपे हुए हैं |

सातवां जुमला : (बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे)
इंसान और तमाम मख्लूकात अल्लाह के इल्म के किसी एक हिस्से तक भी नहीं पहुँच सकते मगर अल्लाह ही जिसको जितना इल्म अता करना चाहें सिर्फ उतना ही इल्म उसको मिल सकता है।

आठवां जुमला : (उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है)
उसकी कुर्सी इतनी बड़ी है कि उस में सातों ज़मीन और सातों आसमान समाये हुए हैं इस किस्म की आयत को इंसान अपने ऊपर कयास न करे क्यूंकि अल्लाह की कुदरत को समझ पाना इंसान की समझ से बाहर है।

नवां जुमला : (ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर दुशवार नहीं)
अल्लाह को ज़मीन व आसमान की हिफाज़त कोई बोझ महसूस नहीं होती बल्कि उसकी कुदरत के सामने ये आसान चीज़ें हैं।

दसवां जुमला : (वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है)
यानि वो आली शान और अजीमुश शान है . पिछले नौ जुमलों में अल्लाह की जातो सिफ़ात के कमालात बयान हुए हैं उनको देखने और समझने के बाद हर अक्ल वाला इंसान यही कहने पर मजबूर है कि हर इज्ज़त, अजमत, बलन्दी व बरतरी सिर्फ अल्लाह ही को ज़ेबा है।

 

Arabic Transliteration हिंदी अनुवाद

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

2:255
اللَّـهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴾ 255 ﴿

हिंदी अनुवाद

अल्लाह जिसके सिवा कोई माबूद नहीं
वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है
न उसको ऊंघ आती है न नींद
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है
कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके
वो उसे भी जनता है जो मख्लूकात के सामने है और उसे भी जो उन से ओझल है
बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे
उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है
ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर दुशवार नहीं
वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है

 

Ayatul Kursi
ayatul kursi in arabic

Ayatul kursi in Hindi
आयतुल कुर्सी हिंदी में

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू अल हय्युल क़य्यूम

ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम

लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़

मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इज़निह

यअलमु मा बैना अयदीहिम वमा खल्फहुम

वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ

वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़

वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्युल अज़ीम

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Ayatul kursi in hindi meaning
अल्लाह वह ज़ात है जिसके इलावा कोई सच्चा माबूद नहीं हमैशा ज़िंदा रहने वाला और (सब) को क़ाइम रखने वाला हे, न उसे ऊंघ आती हे न नींद, उसी के लिये हे जो आसमानों में हे और जो ज़मीन में हे, कौन हे जो उसकी इजाज़त के बगैर उसके पास सिफ़ारिश कर सके, जो लोगों के सामने हे और जो उनके पीछे हे सब को जानता हे, लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता नहीं कर सकते मगर जो वह चाहे, उसी की कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए हे, और दोनों की हिफाज़त उसे थकाती नहीं, और वह बुलंद अज़मत वाला हे।

Ayatul kursi in Roman English
Ayatul kursi in Roman Urdu

Allahu laaa ilaaha illaa huwal haiyul qai-yoom; laa taakhuzuhoo sinatunw wa laa nawm; lahoo maa fissamaawaati wa maa fil arz; man zallazee yashfa’u ‘indahooo illaa be iznih; ya’lamu maa baina aideehim wa maa khalfahum; wa laa yuheetoona beshai immin ‘ilmihee illa bi maa shaaa’; wasi’a kursiyyuhus samaa waati wal arz; wa la ya’ooduho hifzuhumaa; wa huwal ‘aliyyul ‘azeem.
Ayatul Kursi in English (Translation)

Allah! There is no god ˹worthy of worship˺ except Him, the Ever-Living, All-Sustaining. Neither drowsiness nor sleep overtakes Him. To Him belongs whatever is in the heavens and whatever is on the earth. Who could possibly intercede with Him without His permission? He ˹fully˺ knows what is ahead of them and what is behind them, but no one can grasp any of His knowledge—except what He wills ˹to reveal˺. His Seat1 encompasses the heavens and the earth, and the preservation of both does not tire Him. For He is the Most High, the Greatest.

Quran 2:255

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क्या आप Ayatul Kursi hindi mai पढ़ना चाह रहे हैं? क्या आप आयतल कुर्सी को हिंदी अरबी एवं अंग्रेजी में पढ़ना चाहते हैं। मैंने आपका पूरा ख्याल रखा है, आगे पढ़िए।

ayatul kursi in hindi
क्या आप आयतुल कुर्सी की अहमियत जानते हैं? उम्मीद है कि आप जानते ही होंगे। थोड़ा मैं और जोड़ना चाहता हूं। आयतल कुर्सी को एक चैथाई कुरान कहा जाता है। जो इंसान फजर की नमाज़ के बाद पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं।

अयातुल कुरसी, रसूल एस.ए. की हदीस के अनुसार, कुरान की सबसे अद्भुत आयत है, कहा जाता है कि इस आयत में सुरक्षात्मक गुण हैं, जो इसके पढ़ने वाले को सभी नुकसानों से सुरक्षित रखता है।
एक हदीस में कहा गया है कि ” जो इंसान हर फजऱ् नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता हों, उस इंसान को जन्नत में जाने से कोई चीज़ नहीं रोक है, वह है उसकी मौत”। सबसे ज्यादा अज़मत वाली आयतों में से एक है आयतुल कुर्सी।

Ayatul Kursi In Hindi

आयतल कुर्सी इन हिंदी, आप सर्च करते हैं और मैंने आपके लिए वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया। लेकिन एक बात याद रखें कि किसी भी दुआ को अरबी भाषा में पढ़ना अफजल माना जाता है।

 

आयतल कुर्सी इन हिंदी

अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल
क़य्यूमु ला तअ् खुज़ुहू सि-न तुंव-व ला नौम लहू मा
फि़स्समावातिं व मा फ़िल अर्ज़ि मन ज़ल्लज़ी यश् फ़उ
अिन-द-हू इल्ला बिइज़्निही यअ्लमु मा बै-न ऐदीहिम
व मा ख़ल-फ़ हुम व ला युहीतू-न बि शैइम मिन
अिल्मि ही इल्ला बि-मा शा-अ व सि-अ
कुर्सि-युहूस्समावाति वल अर्ज़ि व ला यऊदु हू
हिफ़्जुहुमा व हुवल अ़लीयुल अज़ीम।

आपके आसानी के लिए मैंने, आयतुल कुर्सी हिंदी टेस्ट के साथ अरबी टेस्ट को भी इमेज फॉरमैट में दिया है। ताकि कोई एरर ना हो जाए। अच्छा लगे तो मुस्लिम भाइयों के लिए इसे शेयर ज़रूर करें। अरबी में आयतल कुर्सी पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें।

Ayatul Kursi In Arabic Text
اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاواتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
Ayatul Kursi In English Text
Allahu laaa ilaaha illaa huwal haiyul qai-yoom, laa taakhuzuhoo sinatunw wa laa nawm.
lahoo maa fissamaawaati wa maa fil ard, man zallazee yashfa – u – indahooo illaa be iznih.

ya-lamu maa baina aideehim wa maa khalfahum, wa laa yuheetoona beshai ‘immin ‘ilmihee illa be maa shaaaa.

wasi’a kursiyyuhus samaa waati wal arda wa la ya’ooduho hifzuhumaa, wa huwal aliyyul ‘azeem.

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Ayatul Kursi Tarjuma In Hindi
आयतल कुर्सी तर्जुमा – अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह जिंदा है, दुनिया को कायम रखने वाला, ना उसको ऊघं दबा सकती है, ना नींद, उसी का है जो कुछ आसमानों और जो कुछ जमीन में है।

कौन है, जो उसकी जनाब मैं बग़ैर उसकी इजाज़त के सिफारिश कर सके, वह जानता है। उनके तमाम हाज़िर व ग़ायब हालात को और उसकी मालूमात में से किसी भी चीज को अपने इल्म के एहाते में नहीं ला सकते।

आयतल कुर्सी पढ़ने के फायदे जान लें
अल्लाह के रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम फरमाते हैं कि

“जो शख्स सुबह के वक्त यह आयत पढ़े लें तो उसका दिन उसने अल्लाह के नाम के इनामो शुक्र अदा कर दिया है। अगर यह आयत वह शाम को पढ़े लें तो उस रात के खुदा के इनामो का शुक्र अदा कर दिया “

हज़रत सोबन रदी अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि

” अल्लाह के रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाएं कि हर मुसलमान बंदा में दिए कल में पढ़ें। अगर वह पढ़ता है तो अल्लाह के जिम्मे में होगी उसकी कयामत के दिन, उसे रजी करें”।

हजरत माकल बिन यासर (रजि०) का बयान है कि

“जो शख्स तीन बार आयतल कुर्सी पढ़ता हो, उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को मक्कार फरमा देगा। जो शाम तक उस पर रहमत भेज रहेगें। अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मारेगा। जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी। वह सुबह तक वह रहमत भेज रहेगें”।

आयतल कुर्सी के फायदें

फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद पढने से अगली नमाज़ तक अल्लाह अपनी हिफाज़त में ले लेता है.
रात को सोते वक़्त पढने से अल्लाह तआला एक फ़रिश्ता हिफाज़त के लिए मुक़र्रर कर देता है.
जिस घर में पढ़ी जाती है, शैतान वहां से निकल जाता है.
इस आयत को पढने से मरने के बाद सीधा जन्नत में जायेगा. इसको पढने से डर और खौफ़ से नजात मिलती है.
फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद पढने से अगली नमाज़ तक अल्लाह अपनी हिफाज़त में ले लेता है.
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Ayat al-Kursi: The Magnificent Throne Verse
In the vast tapestry of the Quranic verses lies a gem of immense significance and power – Ayat al-Kursi, also known as “The Throne Verse.” This verse, nestled within Surah Al-Baqarah (Chapter 2), Verse 255, holds a profound place in the hearts of Muslims worldwide. Its recitation is a spiritual act and a source of solace and protection in the face of life’s challenges.
The Essence of Ayat al-Kursi: Ayat al-Kursi encapsulates the grandeur and magnificence of the divine throne. It serves as a reminder of the boundless power and wisdom of Allah.

The verse portrays Allah’s unique position as the One who sustains all existence and the One who is beyond human comprehension. The metaphor of the throne highlights Allah’s sovereignty and the unfathomable depths of His knowledge.

The Power and Significance: In the realm of Islamic teachings, Ayat al-Kursi holds an esteemed place. It is considered one of the most powerful verses in the Quran. This verse is not just a collection of words; it carries a spiritual force that resonates with believers within it.

The recitation of Ayat al-Kursi is believed to invoke Allah’s protection, tranquillity, and blessings. Its potent words are a source of comfort in distress and a shield against negative influences.

The Practice of Recitation: Reciting Ayat al-Kursi has become a cherished practice among Muslims. It is a connection to the divine, a means to seek solace, and a reminder of Allah’s presence.

While no fixed number of times is prescribed for its recitation, many believers include it in their daily routines. Some recite it after each obligatory prayer, while others make it a part of their morning and evening supplications.

The Universal Appeal: One of the remarkable aspects of Ayat al-Kursi is its universal appeal. Regardless of age, gender, or background, Muslims from all walks of life find solace in their words. Its accessibility and the peace it brings have contributed to its widespread recitation across generations.

Beyond Ritual, A Spiritual Connection: While reciting Ayat al-Kursi, believers establish a direct link with the divine. This practice transcends the realm of ritual; it becomes a personal conversation with Allah. The words resonate deeply, providing a sense of security and guidance amidst the complexities of life.

Last Words: Ayat al-Kursi is not merely a sequence of verses; it is a source of strength, a beacon of hope, and a channel for divine connection. Its essence lies in its ability to touch hearts and transform lives.

As Muslims recite these sacred words, they are reminded of Allah’s unwavering presence and the infinite wisdom that guides their journey. In Ayat al-Kursi, believers find not only a verse but a sanctuary of faith, a shield of protection, and a source of unending blessings.

Ayatul kursi – Conclusion Points
उम्मीद करता हूं कि आपको आयतल कुर्सी पढ़ना आ गया होगा। अभी से याद कैसे किया जाए। मैंने आपके सुविधा के लिए एक फोटो बनाया है जिसमें Arabic और Hindi दोनों एक साथ लिखा गया है।

10 से 12 दिनों तक आप इस इमेज को देखकर पढ़ते रहिए। इस तरह से कुछ दिनों में ही आपको Ayatul kursi याद हो जाएगा।

सही तलफूज के साथ भी पढ़ना बहुत ही आवश्यक है। इस वीडियो के लिंक को भी आप क्लिक करके चेक कर सकते हैं।

आयतुल कुरसी को किसी भी प्रकार की बुराई या पीड़ा के खिलाफ एक उत्कृष्ट सुरक्षा के रूप में जाना जाता है और हम मुसलमान जीवन भर आने वाली कठिनाइयों से निपटने में मार्गदर्शन के लिए इस पर भरोसा करते हैं।

इसके अतिरिक्त, नियमित रूप से पढ़ने पर अयातुल कुर्सी बीमारी से शारीरिक उपचार भी प्रदान कर सकती है। कई इस्लामी विद्वानों का मानना है कि इस आयत में ईश्वरीय मार्गदर्शन के रहस्य हैं, जो आध्यात्मिक ज्ञान को खोलते हैं जो अनंत काल से मानव जाति से छिपा हुआ है।

आयतल कुर्सी PDF Free Download

 

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيم

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम
2.255: ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) ज़िन्दा है (और) सारे जहान का संभालने वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है (खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी सब आसमानॊं और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगेहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजुर्ग़ मरतबा है .

2.256: दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख्स ने झूठे खुदाओं बुतों से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत रस्सी पकड़ी है जो टूट ही नहीं सकती और ख़ुदा सब कुछ सुनता और जानता है .

2.257: ख़ुदा उन लोगों का सरपरस्त है जो ईमान ला चुके कि उन्हें (गुमराही की) तारीक़ियों से निकाल कर (हिदायत की) रौशनी में लाता है और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके सरपरस्त शैतान हैं कि उनको (ईमान की) रौशनी से निकाल कर (कुफ़्र की) तारीकियों में डाल देते हैं यही लोग तो जहन्नुमी हैं (और) यही उसमें हमेशा रहेंगे.

अरबी में पढ़ें

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

अल्लाहो ला इलाहा इल्ला होवा, अल -हय्युल क़य्यूमो, ला’ता ख़ु-ज़ोहू सेनातुन वाला नौमुन,

लहू मा फ़ीस समावाते व मा फिल अर्ज़े, मन ज़ल लज़ी यश-फ-ओ’ इ’न्दहू इल्ला बे-इज़्नेही, या’लमो मा बैना अय्दीहीम व मा ख़ल’फ़हुम, व ला योहीतूना बे शै’यिम मिन इ’ल्मेही इल्ला बेमा शा-अ, वसे-अ’ कुर्सिय्यो’हुस समावाते वल अर्ज़, व ला या-ऊदोहू हिफ़’ज़ोहोमा, व होवल अ’लिय्युल अ’ज़ीमो.

ला इक्राहा फ़िद दीन, क़द तबय्या-नर रुश्दो मेनल गै’यए , फ़’मय्न यक्फुर बीत-ताग़’हूते व यू-मीम बिल्लाहे फ़क़दिस तमसका बिल-उ’र्वातिल वुसक़ा, लन्फेसामा लहा, वल्लाहो समी-उ’न अ’लीमुन. अल्लाहो वालिय्युल लज़ीना आ’मनू, युखरेजोहुम मेनज़ ज़ोलोमाते एलन नूरे, वल’लज़ीना कफरू अव्लेया-ओ-होमुत ताग़’हूतो युखरे’जूनाहुम मेनन नूरे इ’लाज़ ज़ोलोमाते, ऊला-एका अस्हाबुन नारे, हुम फ़ीहा ख़ालेदून !

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कॉपी करने लायक़ अरबी टेक्स्ट

للَّـهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖوَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴿٢٥٥﴾ لَا إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ ۖ قَد تَّبَيَّنَ الرُّشْدُ مِنَ الْغَيِّ ۚ فَمَن يَكْفُرْ بِالطَّاغُوتِ وَيُؤْمِن بِاللَّـهِ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ لَا انفِصَامَ لَهَا ۗ وَاللَّـهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ﴿٢٥٦

 

आयतल कुर्सी पढ़ने से अल्लाह की तवज्जोह अपने बन्दों की तरफ हो जाती है!

 

6ठे इमाम जाफर सादिक (आ:स) ने फरमाया: :

لَمَّا أَمَرَ اللَّهُ عَزَّ وَ جَلَّ هَذِهِ الْآيَاتِ أَنْ يَهْبِطْنَ إِلَى الْأَرْضِ تَعَلَّقْنَ بِالْعَرْشِ وَ قُلْنَ أَيْ رَبِّ إِلَى أَيْنَ تُهْبِطُنَا إِلَى أَهْلِ الْخَطَايَا وَ الذُّنُوبِ فَأَوْحَى اللَّهُ عَزَّ وَ جَلَّ إِلَيْهِنَّ أَنِ اهْبِطْنَ فَوَ عِزَّتِي وَ جَلَالِي لَا يَتْلُوكُنَّ أَحَدٌ مِنْ آلِ مُحَمَّدٍ وَ شِيعَتِهِمْ فِي دُبُرِ مَا افْتَرَضْتُ عَلَيْهِ مِنَ الْمَكْتُوبَةِ فِي كُلِّ يَوْمٍ إِلَّا نَظَرْتُ إِلَيْهِ بِعَيْنِيَ الْمَكْنُونَةِ فِي كُلِّ يَوْمٍ سَبْعِينَ نَظْرَةً أَقْضِي لَهُ فِي كُلِّ نَظْرَةٍ سَبْعِينَ حَاجَةً وَ قَبِلْتُهُ عَلَى مَا فِيهِ مِنَ الْمَعَاصِي وَ هِيَ أُمُّ الْكِتَابِ وَ شَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لا إِلهَ إِلَّا هُوَ وَ الْمَلائِكَةُ وَ أُولُوا الْعِلْمِ وَ آيَةُ الْكُرْسِيِّ وَ آيَةُ الْمُلْكِ

“When Allah, the Noble and Grand, commanded the verse (mentioned at the end of this tradition) to descend down to the Earth, they (the verses) attached themselves to the Throne (of Allah) and said, ‘O Lord! Where are you sending us to? Are you sending us to a place of [the People of] transgressions and sins?’ Allah, the Noble and Grand, revealed to them (the verses), ‘Go down as I swear by My Greatness and My Majesty that not a single person from amongst the progeny of Muhammad and their followers (Shia) shall recite you after that which I have made obligatory upon them (the five canonical prayers) every day except that I will glance at them with a special glance with My eyes seventy times every day and with every glance, I will fulfill seventy of their desires and I will accept (their supplications) even though they have sins (on their record) and these verses will make up the basis of The Book (Ummul Kitab – meaning Suratul Hamd) and the verse, ‘Allah bears witness that there is no other entity worthy of worship except for Him and so do the angels (bear witness to this) and so do those who possess knowledge’ [Q. 3:18] and Ayatul Kursi and the verse of dominion, ‘Say: To Allah belongs the Kingdom…’ [Q. 3:26].”[1]

 

Dua Surah
आयतुल कुर्सी हिन्दी में तर्जुमा के साथ। Ayatul Kursi In Hindi.

 

दोस्तों आयतुल कुर्सी हर मुसलमान को याद होना चाहिए। क्योंकि आयतुल कुर्सी पढ़ने के बहुत से फायदे हैं। एक हदीस में कहा गया है कि ” जो इंसान हर फजऱ् नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता हों, उस इंसान को जन्नत में जाने से कोई चीज़ नहीं रोक सकती है, वह है उसकी मौत”। सबसे ज्यादा अज़मत वाली आयतों में से एक है आयतुल कुर्सी। अगर आपको याद नहीं है । तो कोई बात नहीं। हमने यही पर आयतुल कुर्सी तीन अलग-अलग भाषाओं में तर्जुमा के साथ लिखा है । जिसे आप को याद करने में आसानी होगी। Ayatul Kursi In Hindi । हिंदी में आयतूल कुर्सी ।

 

 

आयतुल कुर्सी हिन्दी में। Ayatul Kursi In Hindi.

 

बिस्मिल्लाहिर् रहमानीर् रहीम।
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू अल हय्युल क़य्यूम
اللَّـهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ

ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम
لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ

लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़
لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ

मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इज़निह
مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ

यअलमु मा बैना अयदीहिम वमा खल्फहुम
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ

वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ
وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ

वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़
وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ

वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्युल अज़ीम
وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

आयतुल कुर्सी हिन्दी में तर्जुमा के साथ। Ayatul Kursi In Hindi.
आयतुल कुर्सी हिन्दी में तर्जुमा के साथ। Ayatul Kursi In Hindi.

आयतुल कुर्सी हिन्दी तर्जुमा। Ayatul Kursi Hindi Tarzuma.
अल्लाह वह ज़ात है जिसके इलावा कोई सच्चा माबूद नहीं है । हमेशा ज़िंदा रहने वाला और (सब) को क़ायम रखने वाला है, न उसे ऊंघ आती है न नींद, उसी के लिये है जो आसमानों में है और जो ज़मीन में है, कौन है जो उसकी इजाज़त के बगैर उसके पास सिफ़ारिश कर सके, जो लोगों के सामने है और जो उनके पीछे है सब को जानता है, लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता नहीं कर सकते मगर जो वह चाहे, उसी की कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और दोनों की हिफाज़त उसे थकाती नहीं, और वह बुलंद अज़मत वाला है।
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हजरत माकल बिन यासर (रजि०) का बयान
हजरत माकल बिन यासर (रजि०) का बयान है कि
“जो शख्स तीन बार आयतुल कुर्सी पढ़ता हो, उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को मक्कार फरमा देगा। जो शाम तक उस पर रहमत भेज रहेगें। अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मारेगा। जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी। वह सुबह तक वह रहमत भेज रहेगें”।

आयतुल कुर्सी की फजीलत । Ayatul Kursi Ki Fajilat.
आयतुल कुर्सी कुरान की सब से अजीम तरीन आयत है हदीस में रसूलल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इसको तमाम आयात से अफजल फरमाया है।
हज़रत अबू हुरैरा रजिअल्लाहू तआला अनहू फरमाते हैं कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया : सूरह बकरा में एक आयत है जो तमाम कुरान की आयातों की सरदार है । यह आयत जिस घर में पढ़ी जाये शैतान वहां से निकल जाता है।

आयतुल कुर्सी की खासियत । Ayatul Kursi Ki khasiyat.
इस सूरत में अल्लाह की तौहीद ( अल्लाह को एक मानना ) को साफ तौर पर बताया गया है और शिर्क को रद किया है ।

 

Conclusion

आयतुल कुर्सी हिन्दी के साथ अरबी में इस लिए लिखा गया है क्योंकि अरबी भाषा को हिन्दी में लिखना बहुत कठिन है। अरबी भाषा को अरबी में पढना आसान है। इसीलिए आयतुल कुर्सी हिन्दी के साथ अरबी में लिखा गया है। तो उम्मीद है आप को ये पोस्ट अच्छा लगा होगा। अगर आपने यहा तक पोस्ट को पढ़ लिया है तो पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे और अगर कहीं गलती से कही कोई हिन्दी का शब्द ग़लत हो तो हमें कमेंट में जरूर बताएं। अल्लाह तआला हमें और दूनिया के तमाम मुस्किलात को दुर करे और दीन के रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

 

 

FAQ.S

What is the meaning of Ayat Al-Kursi in English?
2.255: Allah-There Is No God Except Him;
He Is Alive (Eternally, On His Own)
And The Upholder (Keeps Others Established);
He Never Feels Drowsy Nor Does He Sleep;
To Him Only Belongs All Whatever Is In The Heavens
And All Whatever Is In The Earth;
Who Is He That Can Intercede* With Him Except By His Command?
He Knows What Is In Front Of Them And What Is Behind Them;
And They Do Not Achieve Anything Of His Knowledge
Except What He Wills; His Throne (Of Sovereignty)
Encompasses The Heavens And The Earth;
And It Is Not Difficult For Him To Guard Them;
And He Is The Supreme, The Greatest.
(This Verse Is Popularly Known As Ayat Al-Kursi.
It Has A Special Status And Reciting It Carries Great Reward.
*Prophet Mohammed Peace And Blessings Be Upon Him
Will Be The First One To Be Granted The Permission To
Intercede, Others Will Follow.)

अतल कुर्सी के मायने क्या है?
क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

आयतल कुर्सी कितने पारा में है?
सूरह ए ब’क़रह , पारा 3, आयत नंबर 255

अयातुल कुर्सी कौन सी आयत है?
सूरह ए ब’क़रह , पारा 3, आयत नंबर 255

अयातुल कुर्सी इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

FAQs IN HINDI

प्रश्न – आयतुल कुरसी क्या है? (What is Ayat al-Kursi?)
उत्तर: आयतुल कुरसी कुरान की एक आयत है, विशेष रूप से सूरह अल-बकराह (2:255), जो इस्लाम में बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न – आयतुल कुरसी का क्या अर्थ है? (What is the meaning of Ayat al-Kursi?)
उत्तर: आयतुल कुरसी का अंग्रेजी में अनुवाद “The Throne Verse” है। इसमें अल्लाह के सिंहासन की महानता और भव्यता का वर्णन किया गया है।

प्रश्न – आयतुल कुरसी क्यों महत्वपूर्ण है? (Why is Ayat al-Kursi important?)
उत्तर: आयतुल कुरसी को कुरान की सबसे शक्तिशाली आयतों में से एक माना जाता है। यह अल्लाह की अतुलनीय शक्ति और ज्ञान पर जोर देता है और उसकी उपस्थिति और सुरक्षा की याद दिलाता है।

प्रश्न – क्या आप आयतुल कुरसी का अनुवाद प्रदान कर सकते हैं? (Can you provide the translation of Ayat al-Kursi?)
उत्तर: ज़रूर! आयतुल कुरसी का अनुवाद इस प्रकार है: “अल्लाह! उसके अलावा कोई माबूत नहीं है, जो सदैव जीवित है, अस्तित्व का पालनकर्ता है। न तो उनींदापन उसे घेरता है और न ही नींद। उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती पर है।”

प्रश्न – क्या मुझे आयतल कुर्सी पढ़ने से फायदा हो सकता है?(How can I benefit from reciting Ayat al-Kursi?)
उत्तर: आयतुल कुरसी पढ़ने से कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें बुरे प्रभावों से सुरक्षा, नुकसान से सुरक्षा, दिल के लिए शांति और दैनिक जीवन में आशीर्वाद शामिल हैं।

प्रश्न – क्या आयतुल कुरसी पढ़ने कोई विशिष्ट समय या स्थान है? (Is there a specific time or place to recite Ayat al-Kursi?)
उत्तर: आप किसी भी समय और किसी भी स्थान पर आयतुल कुरसी पढ़ने सकते हैं। हालांकि, अतिरिक्त आशीर्वाद के लिए प्रत्येक वाजिब नमाज के बाद इसे पढ़ने की सिफारिश की जाती है।

प्रश्न – क्या कोई आयतुल कुरसी पढ़ सकता है? (Can anyone recite Ayat al-Kursi?)
उत्तर: हां, कोई भी उम्र या लिंग की परवाह किए बिना आयतुल कुरसी पढ़ सकता है। हम मुसलमानों को इसे याद करने और इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

प्रश्न – क्या आयतुल कुरसी पढ़ने के लिए कोई निर्धारित संख्या है? (Is there a specific number of times to recite Ayat al-Kursi?)
उत्तर: इस्लामी शिक्षाओं में कोई विशिष्ट संख्या का उल्लेख नहीं है। आप अपनी व्यक्तिगत पसंद और भक्ति के आधार पर आयतुल कुरसी पढ़ सकते हैं!

आयतल कुर्सी (क़ुरान 2:255- 7)

आयतुल कुर्सी कुर्सी को इंग्लिश में क्या कहते हैं?
कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

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