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उमंगें जोश पर आईं, इरादे गुदगुदाते हैं उमंगें जोश पर आईं, इरादे गुदगुदाते हैं जमीले-क़ादरी शायद हबीबे-हक़ बुलाते हैं जगा देते हैं क़िस्मत चाहते हैं जिस की दम भर में वो जिस को चाहते हैं अपने रोज़े पर बुलाते हैं उन्हें मिल जाता है गोया वो साया अर्शे-आ’ज़म का तेरी दीवार के साये में जो बिस्तर … Read more