कहीं पे भाई कहीं पे भांजा 

कहीं पे भाई कहीं पे भांजा कहीं पे भाई, कहीं पे भांजा, कहीं पे बेटा लुटा दिया है। हुसैन ने सर कटा के दीने, नबी की अज़मत बचा लिया है।। तू मुझको पानी क्या देगा ज़ालिम, में जामे कौसर को ही पियूंगा। ये कहके असगर ने करबला में, यज़ीदियों को हिला दिया है।। लहू मुसल्ला …

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