जब तक जियूं मैं आक़ा कोई ग़म न पास आए
जब तक जियूं मैं आक़ा कोई ग़म न पास आए जब तक जियूं मैं आक़ा कोई ग़म न पास आए जो मरूं तो हो लहद पर तेरी रेहमतों के साए है ख़िज़ा ने डाले डेरे, मुर्जा गए हैं सब गुल मेरे उजड़े बाग़ में फिरआक़ा बहार आए रहूं जब तलक मैं ज़िंदा कोई ग़म … Read more