पार बेड़े को लगा देते हैं गौस ए आजम ।
पार बेड़े को लगा देते हैं गौस ए आजम । डूबी नाव को तिरा देते हैं गौस ए आजम मेरे सरकार की मुट्ठी में हैं आलम के कूलूब। दम में रोतो को हंसा देते हैं गौस ए आज़म। चोर चोरी करे अब्दाल का रुतबा पाए। शान बंदे की बढ़ा देते हैं गौस ए आजम। बाखुदा … Read more