आख़री उम्र में क्या रौनके-दुनियां देखूं
आख़री उम्र में क्या रौनके-दुनियां देखूं आख़री उम्र में क्या रौनके-दुनियां देखूं अब तो बस एक ही धुन है के मदीना देखूं अब तो बस एक ही धुन है… जालियां देखूं के दीवारो-दरो-बामे-हरम अपनी मअज़ूर निगाहों से मैं क्या क्या देखूं अब तो बस एक ही धुन है के मदीना देखूं अब तो बस … Read more