ये नाज़ ये अंदाज़ हमारे नहीं होते

ये नाज़ ये अंदाज़ हमारे नहीं होते ये नाज़, ये अंदाज़, हमारे नहीं होते झोली में अगर टुकड़े तुम्हारे नहीं होते जब तक के मदीने से इशारे नहीं होते रौशन कभी क़िस्मत के सितारे नहीं होते बे-दाम ही बिक जाइए बाज़ार-ए-नबी में इस शान के सौदे में ख़सारे नहीं होते दामान-ए-शफ़ाअ’त में हमें कौन छुपाता … Read more