बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी

तारीफ़ तेरी आक़ा से सुनी, ग़नी ग़नी उस्मान-ए-ग़नी
तुम शाने सहाबा जान-ए-नबी, ग़नी ग़नी उस्मान-ए-ग़नी
दुनिया के सभी सखियों से सख़ि, ग़नी ग़नी उस्मान-ए-ग़नी
जब तुझ को पुकारा बात बनी, ग़नी ग़नी उस्मान-ए-ग़नी

बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

ख़ुदा-ए-पाक की है एक अता, उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन
मुहम्मद मुस्तफ़ा के बा-वफ़ा, उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन

मुक़द्दर मे तेरे आए नबी के दो जिगर पारे
बहोत ऊँचा है तेरा मर्तबा उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन

बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

तुजे दो हिज़रतों से हक़ तआला ने नवाज़ा है
के मौला की है तुझ पे ये अता उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन

बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

पेहला ख़लीफ़ा सिद्दीक़ और दूसरा है उमर
तीसरा उस्मान है और चौथा मौला अली
रसूलल्लाह को तेरे अमल पे ये भरोसा है
बना है तू सफ़ीर-ए-मुस्तफ़ा उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन
बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

हया तेरी नबी को है, हया तेरी मलाइक को
है मशहूरे जहाँ तेरी हया उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन

बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

जहेज़-ए-फ़ातिमा ज़हरा दिया उस्मान ने तैयब
है तू महबूब-ए-आले मुर्तज़ा, उस्मान-ए-ज़ुन्नुरैन

बा-वफ़ा बा-हया उस्मान-ए-ग़नी
तीसरा ख़लीफ़ा हुवा उस्मान-ए-ग़नी

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