आँखों में नूर आ गया है जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

अर्श का ज़ीना नज़र आ गया
जिस को मदीना नज़र आ गया

दिल में सुरूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

का’बा देखा तो चलो गुम्बदे-ख़ज़रा देखो
जिन की मर्ज़ी से हरम बन गया क़िब्ला देखो
है शिफ़ाख़ाना-ए-रेहमत में दवा बख्शीश की
तुम को ‘जाऊका’ बुलाता है मदीना देखो

मुक़द्दर वो चमका गया है
जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

गुल भी देखे हो अनादिल भी बहुत देखे हो
चहचहाता है यहाँ बुलबुले-सिदरा देखो
बन गए आक़ा, यहाँ जिस ने गुलामी मांगी
है तलब क़तरे की, मिल जाता है दरिया देखो

सब कुछ उसे मिल गया है
जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

मांगी जाएगी जभी माँ की सनद महशर में
मैं तो रज़वी हूँ ये कह दूंगा कि शजरा देखो
रम्ज़ ‘ला उक्सि़मु’ आएगा समझ में फ़ैज़ी
आला हज़रत की निगाहो से मदीना देखो
अहमद रज़ा ने कहा है
जिस ने मदीना देखा है

आँखों में नूर आ गया है
जिस ने मदीना देखा है

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