Ham Ne Kya Ahmad Raza Dekha Tujhe Lyrics
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
अहमद रज़ा का ताज़ा गुलिस्तां है आज भी
ख़ुर्शीद इ़ल्म उनका दरख़्शां है आज भी
किस तरहं इतने इ़ल्म के दरिया बहा दिये
उल्मा-ए-ह़क़ की अक़्ल तो हैरां है आज भी
ऐ रज़ा, ऐ रज़ा, ऐ रज़ा, ऐ रज़ा
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
ह़क़ त’आला की क़सम अहमद रज़ा
नाइब-ए-ख़ैरुलवरा देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
मुश्किलों को तूने आसां कर दिया
ऐ रज़ा मुश्किल कुशा देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
मुक़्तदा आ कर हों तेरे मुक़्दती
हमने ऐसा पेशवा देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
हो इमाम-ए-अहले सुन्नत बिल यकीं
आलिमों का मुक़्तदा देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
जान जब तक जिस्म में बाक़ी रही
हमने शैदा दीन का देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
बन्दा-ए-महमूद जाने ऐ रज़ा
मज़हर-ए-ज़ात-ए-ख़ुदा देखा तुझे
हमने क्या अहमद रज़ा देखा तुझे
सिर्र-ए-ज़ात-ए-मुस्तफ़ा देखा तुझे
Manqabat Khwan: Hafiz Furqan Raza Qadri
Ham ne Kya Ahmad Raza Dekha Tujhe Manqabat Lyrics