Mujhe Zindagi Main Ya Rab Lyrics

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Jo Tujhi Se Lau Laga De, Kyon Mujhe Mera Pata De
Mere Ahad Ki Zaba.n Me Mujhe Gumrahi Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Badi Door Hai Abhi Rag e Jaan Ki Masafat
Jo Diya Hai Qurb Tune, To Shaoor Bhi Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Tere Dard Ki Chamak Ho, Teri Yaad Ki Kasak Ho
Mere Dil Ki Dhadkano Ko Nayi Be-Kali Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Bhari Anjuman Me Rahkar, Na Hun Aashna Kisi Se
Mujhe Doston Ke Jhurmut Me Wo Be-Kasi Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Mein Safar Me So Na Jaun, Mein Yahin Pe Kho Na Jaun
Mujhe Jouq-o-Shouq-e Manzil Ki Hama-Hami Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Kahin Mujhko Das Na Jaayein, Ye Andhere Bijliyon Ke
Jo Dilon Me Noor Kar De Wo Hee Roushani Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

Mujhe Teri Just-Ju, Ho Mere Dil Me Tu Hee Tu Ho
Mere Qalb Ko Wo Faiz e, Dar e Aarfi Ata Kar

 

Mujhe Zindagi Me Ya Rab Sare Bandagi Ata Kar
Mere Dil Ki Be-hisi Ko Gham e Ashiqi Ata Kar

 

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

जो तुझी से लौ लगा दे, क्यूँ मुझे मेरा पता दे
मेरे अ़हद की ज़बां में मुझे गुमरही अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

बड़ी दूर है अभी तक रगे जान की मसाफ़त
जो दिया है क़ुर्ब तूने, तो शऊ़र भी अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

तेरे दर्द की चमक हो, तेरी याद की कसक हो
मेरे दिल की धड़कनों को नयी बे-कली अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

भरी अन्जुमन में रहकर, ना हूं आशना किसी से
मुझे दोस्तों के झुरमुट में वो बे-कसी अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

मैं सफ़र में सो ना जाऊं, मैं यहीं पे खो ना जाऊं
मुझे जौक़ ओ शौक़ ए मंज़िल की हमा-हमी अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

कहीं मुझको डस ना जायें, ये अंधेरे बिजलियों के
जो दिलों में नूर कर दे वो ही रौशनी अ़ता कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

 

मुझे तेरी जुस्त-जू हो, मेरे दिल में तू ही तू हो
मेरे क़ल्ब को वो फ़ैज़ ए, दर ए आरफ़ी अ़त़ा कर

 

मुझे ज़िन्दगी में या रब सरे बन्दगी अ़त़ा कर
मेरे दिल की बे-ह़िसी को ग़म ए आशिक़ी अ़त़ा कर

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