Shajra e Nasab Taajush Shariah

Shajra e Nasab Taajush Shariah

 

ख़ानवादा ए आला हज़रत

नसब नामा

मौलाना असजद रज़ा बिन
मौलाना अख़्तर रज़ा बिन
मौलाना इब्राहीम रजा़ बिन
मौलाना हामिद रजा़ बिन
ईमाम अहमद रज़ा बिन
मौलाना नक़ी अली बिन
मौलाना रज़ा अली बिन
मौलाना क़ाज़िम अली बिन
मौलाना आज़म अली बिन
मौलाना स्आदत अली बिन
शुजाअत जंग मुहम्मद स’ईदुल्लाह ख़ान बहादुर कंधारी बिन
अब्दुर्रहमान ख़ान बिन
युसुफ ख़ान बिन
दौलत ख़ान बिन
बादल ख़ान बिन
दाऊद ख़ान बिन
बरहेच ख़ान बिन
शर्फुद्दीन बिन
इब्राहीम बिन
क़ैस मलिक अब्दुर्रशीद सहाबिए रसूलﷺ
रिदवानुल्लाहि त्आ़ला अलैहिम अजमाईन

हुज़ूर ताजुश्शरिआ के नाना भी सहाबिए रसूलﷺ सैफ़ुल्लाह हज़रत ख़ालिद बिन वलीद रदिअल्लाहु त्आ़ला अन्ह،

और दादा भी सहाबिए रसूलﷺ क़ैस मलिक अब्दुर्रशीद रदिअल्लाहु त्आ़ला अन्ह،

हज़रत क़ैस मलिक अब्दुर्रशीद जब इस्लाम से सरफराज़ हुए तो नबीएकरीमﷺ ने दुआ फरमाई
और बशारत फरमाई के कै़स मलिक अब्दुर्रशीद की नस्ल में एक सिलसिला ए अज़ीम पैदा होगा जो दीन को क़यामत तक मुस्तहक़म करेगा,

“माअशा अल्लाह,
सुबहान अल्लाह, अलहमदुलिल्लाह,
अल्लाहु अकबर,

तहक़ीक़ मुहम्मद दीन फ़ौत तारीख़ ए कश्मीर)
तहक़ीक़ ईमाम अहमद रज़ा ऐकडमी डरबन साउथ अफ्रीक़ा)

“लाख हीले करें दुश्मनान ए रज़ा, ख़ूब जलतें रहें हासिदान ए रज़ा,
चारों जानिब गड़े हैं निशान ए रजा़,
उनकी हर शान व शौक़त सलामत रहे”
(हुज़ूर हबीब-ए-मिल्लत)

सब उनसे जलने वालों के ग़ुल हो ग‌ए चराग़,
अहमद रज़ा की शमा फ़िरोज़ां है आज भी,

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