कोई दुनिया-ए-अता में नहीं हमता तेरा

कोई दुनिया-ए-अता में नहीं हमता तेरा | तज़मीन – वाह ! क्या जूद-ओ-करम है, शह-ए-बतहा ! तेरा / Koi Duniya-e-Ata Mein Nahin Hamta Tera | Tazmeen of Waah ! Kya Jood-o-Karam Hai, Shah-e-Bat.ha ! Tera कोई दुनिया-ए-‘अता में नहीं हमता तेरा हो जो हातिम को मुयस्सर ये नज़ारा तेरा कह उठे देख के बख़्शिश में … Read more