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दर से न टाल साक़िया सदक़ा दिये बग़ैर दर से न टाल साक़िया, सदक़ा दिये बग़ैर मय-कश न दर से उठेंगे हरगिज़ पिये बग़ैरउनकी गली में जोश-ए-जुनूं का ये हाल है निकला न कोई चाक गिरेबां किये बग़ैर सज्दे में सर झुका तो कहा जज़्ब-ए-इश्क़ ने सज्दा अदा न होगा यहाँ सर दिये बग़ैर ए … Read more