मस्जिदें बुलाती हैं

मस्जिदें बुलाती हैं क्यूँ उदास फिरते हो, राहतें बुलाती हैं आओ ए मुसलमानों ! मस्जिदें बुलाती हैंरब की बन्दगी कर के तुम फ़लाह पाओगे हर अज़ान में तुमको नुसरतें बुलाती हैं क्यूँ उदास फिरते हो, राहतें बुलाती हैं आओ ए मुसलमानों ! मस्जिदें बुलाती हैं नग़्मा-ए-अज़ां का ये मुख़्तसर तआरुफ़ है तुमको दीनो-दुनियां की शौकतें … Read more