मौला की रेहमतों का ख़ज़ीना नज़र में है
मौला की रेहमतों का ख़ज़ीना नज़र में है मौला की रेहमतों का ख़ज़ीना नज़र में है स़ल्ले अ़ला के शहरे-मदीना नज़र में हैतूफ़ां नज़र में है न सफ़ीना नज़र में है तेरा करम ही शाहे-मदीना नज़र में है या रब ! नवाज़, दौलते-सोज़ो-गुदाज़ से बू-ज़र का दिल, बिलाल का सीना नज़र में है देखे कोई हुज़ूर की … Read more