Qaseeda Umar Farooq Lyrics मुह़र्रम की यकुम तारीख़ सन् हिजरी का 23 था उदासी से निढाल उस दिन रसूलुल्लाह का तैबा था फ़लक भी अपनी बीनाई पे शर्मिंदा हुआ होगा यक़ीनन सोचता होगा कि उसने आज क्या देखा ज़रा अब दिल को थामों और सुनो इस क़िस्सा ए ग़म को ना हरगिज़ … Read more