Top 51 Sher of Mirza Ghalib
Top 51 Sher of Mirza Ghalib आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गए, साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था। रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो ‘ग़ालिब’, कहते हैं अगले ज़माने में कोई ‘मीर’ भी था। मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यूँ रात भर नहीं आती। … Read more