दोस्तों, आज हम आप लोगों के लिए कुछ खास 40 हदीसें (40 Hadees in Hindi) लेकर आए हैं। अगर हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की इन हदीसों पर अमल करके इन्हें अपनी ज़िंदगी में उतार लें, तो हम यकीनन दुनिया और आखिरत में कामयाब हो जाएंगे।
हदीस क्या है? (Hadees Kya Hai)
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कौल (यानी आपके फरमान जो आपने अपनी ज़बान मुबारक से फरमाए हों), अमल (जो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अमल करके दिखाया हो) और फेअली (जो काम आपने किया या किसी सहाबा को करते देखा हो और मना ना किया हो) — इन सब को शरीयत की रोशनी में हदीस (Hadees) कहते हैं।
कुछ खास 40 हदीसें यहाँ हिंदी में पोस्ट कर रहे हैं। अल्लाह से दुआ है की हमे इन हदीसों पर अमल की तौफीक अता फरमाए।
बिस्मिल्लाह हिर्रहमानिर रहीम
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जिसने “ला इलाहा इल्लल्लाह” कहा वह जन्नत में जाएगा।
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जो अल्लाह से नहीं मांगता, अल्लाह उस पर नाराज हो जाता है।
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पाकी (सफाई) आधा ईमान है।
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अच्छी बात कहना सदका है।
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मुसलमान, मुसलमान का भाई है।
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दुआ इबादत का मग्ज़ (निचोड़) है।
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आमाल की कबूलियत का दारोमदार नियत के ऊपर है।
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जो खामोश रहा वह निजात पा गया।
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हया में भलाई ही भलाई है।
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आदमी का हश्र उसी के साथ होगा जिससे उसको मोहब्बत है।
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इल्म का हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है।
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चुगली करने वाला जन्नत में दाखिल नहीं होगा।
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दुनिया मोमिन के लिए कैदखाना और काफ़िर के लिए जन्नत है।
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हर भलाई (नेकी) सदका है।
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बाप जन्नत के दरवाज़ों में से बीच का दरवाज़ा है।
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जिहाद कयामत तक जारी रहेगा।
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जो रहम नहीं करता, उस पर रहम नहीं किया जाता।
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जो बड़ों की इज्जत और छोटों से प्यार नहीं करता, वो हम में से नहीं।
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अच्छे काम की तरफ रहनुमाई करने वाला उसको करने वाले की तरह है।
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तुम में से बेहतर शख्स वह है जिसके अखलाक अच्छे हैं।
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जो मुसलमान को धोखा दे वह हम में से नहीं।
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खुश-अखलाकी (यानी लोगो से अच्छे अख्लाक से मिलना) आधा दीन है।
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मुसलमान को गाली देना गुनाह है और उससे लड़ना कुफ्र है।
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जो लोगों का शुक्रिया अदा नहीं करता, वो अल्लाह का भी शुक्र बजा नहीं लाता।
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गाना दिल में निफाक़ पैदा करता है।
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जो अल्लाह ताआला के वास्ते आजिजी (विनम्रता) इख्तियार करता है, अल्लाह ताआला उसको बुलंद करता है।
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नेक आदमी वह है जो दूसरों से इबरत (सबक) हासिल करे।
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आपस के झगड़े से बचो क्योंकि आपस का झगड़ा दीन को मूंढ देने (खत्म कर देने) वाला है।
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आदमी और कुफ्र के दरमियान सिर्फ नमाज छोड़ देने का फर्क है।
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बहादुर वह नहीं जो दूसरे को पछाड़ दे, बल्कि बहादुर वह है जो गुस्से के वक्त अपने ऊपर काबू कर ले।
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आग (जहन्नम) से बचो चाहे खजूर का एक टुकड़ा ही खैरात करके क्यों ना हो।
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गुनाह से तौबा करने वाला ऐसा है जैसे कि उसने गुनाह किया ही नहीं।
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जो आखिरत के दिन पर यकीन रखता है उसको चाहिए कि वह अच्छी बात कहे या फिर खामोश रहे।
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फरिश्ते उस घर में दाखिल नहीं होते जिस घर में कुत्ता या (जानदार की) तस्वीर हो।
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वादा फर्ज के बराबर है।
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जहन्नम (नफ़सानी) ख्वाहिशात से घेर दी गई है और जन्नत नापसंदीदा चीजों (तकलीफों) से घेर दी गई है।
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बख़ील (कंजूस) लोग जन्नत मे दाखिल ना होंगे।
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कपड़े का वह हिस्सा जो टखनों से जितना नीचे होगा उतना हिस्सा जहन्नम में होगा।
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हसद (जलन) से बचो क्योंकि हसद नेकियों को इस तरह बर्बाद कर देता है जिस तरह आग लकड़ी को जलाकर राख कर देती है।
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वह शख्स जन्नत में नहीं जाएगा जिसकी शरारतों से उसका पड़ोसी महफूज ना हो।
🪦 कब्र की पुकार
क्या तुमने भी मुझे याद किया? जरा सुनो:
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मेरे अंदर अंधेरा है, नमाज़ की रोशनी लेते आना।
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मेरे अंदर घबराहट है, तिलावत-ए-कुरान लेते आना।
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मेरे अंदर साँप बिच्छू हैं, हुजूर की सुन्नत लेते आना।
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मेरे अंदर आग है, खौफ-ए-खुदा लेते आना।
जिसकी नमाज़ अच्छी, उसकी ज़िन्दगी अच्छी। जिसकी ज़िन्दगी अच्छी, उसकी मौत अच्छी। जिसकी मौत अच्छी, उसकी कब्र अच्छी। जिसकी कब्र अच्छी, उसकी आखिरत अच्छी। और जिसकी आखिरत अच्छी, उसकी जन्नत पक्की!
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अल्लाह हम सबसे राज़ी हो जाये… आमीन! 🤲