Ayatul Kursi Hindi

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आपकी इच्छा के अनुसार, मैं आयतुल कुर्सी की महत्वपूर्णता के बारे में हिंदी में व्याख्या कर रहा हूँ:

आयतुल कुर्सी एक चैथाई कुरान कहलाती है और इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उस इंसान के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देती है जो इसे फजर की नमाज़ के बाद पढ़ता है।

आयतुल कुर्सी को रसूल एस.ए. की हदीस के अनुसार कुरान की सबसे अद्भुत आयत माना जाता है। इस आयत में सुरक्षात्मक गुण हैं जो इसे पढ़ने वाले को सभी नुकसानों से सुरक्षित रखते हैं।

एक हदीस में कहा गया है कि “जो इंसान हर फजर की नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसे जन्नत में जाने से कोई चीज़ रोक नहीं सकती है, सिवाय उसकी मौत की”। आयतुल कुर्सी सबसे महत्वपूर्ण आयतों में से एक है और इसकी विशेषता अद्भुत है।

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आयतल कुर्सी इन हिंदी

 

  1. अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल 
  2. क़य्यूमु ला तअ् खुज़ुहू सि-न तुंव-व ला नौम लहू मा
  3. फि़स्समावातिं व मा फ़िल अर्ज़ि मन ज़ल्लज़ी यश् फ़उ 
  4. अिन-द-हू इल्ला बिइज़्निही यअ्लमु मा बै-न ऐदीहिम
  5. व मा ख़ल-फ़ हुम व ला युहीतू-न बि शैइम मिन 
  6. अिल्मि ही इल्ला बि-मा शा-अ व सि-अ
  7. कुर्सि-युहूस्समावाति वल अर्ज़ि व ला यऊदु हू 
  8. हिफ़्जुहुमा व हुवल अ़लीयुल अज़ीम। 

 

Ayatul Kursi In Arabic Text 

اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاواتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

Ayatul Kursi In English Text 

Allahu laaa ilaaha illaa huwal haiyul qai-yoom, laa taakhuzuhoo sinatunw wa laa nawm.lahoo maa fissamaawaati wa maa fil ard, man zallazee yashfa – u – indahooo illaa be iznih.

ya-lamu maa baina aideehim wa maa khalfahum, wa laa yuheetoona beshai ‘immin ‘ilmihee illa be maa shaaaa.

wasi’a kursiyyuhus samaa waati wal arda wa la ya’ooduho hifzuhumaa, wa huwal aliyyul ‘azeem.

 

  1. अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल 
  2. क़य्यूमु ला तअ् खुज़ुहू सि-न तुंव-व ला नौम लहू मा
  3. फि़स्समावातिं व मा फ़िल अर्ज़ि मन ज़ल्लज़ी यश् फ़उ 
  4. अिन-द-हू इल्ला बिइज़्निही यअ्लमु मा बै-न ऐदीहिम
  5. व मा ख़ल-फ़ हुम व ला युहीतू-न बि शैइम मिन 
  6. अिल्मि ही इल्ला बि-मा शा-अ व सि-अ
  7. कुर्सि-युहूस्समावाति वल अर्ज़ि व ला यऊदु हू 
  8. हिफ़्जुहुमा व हुवल अ़लीयुल अज़ीम। 

 

 

आयतुल कुर्सी, सूरह बकराह की आयत नंबर 255 है जो कुरान-ए-मजीद में मौजूद है। इसका पाठ करने से बहुत से फ़ायदे होते हैं जैसे कि इससे नेकी की कमाई होती है, नफरत और बुराई से बचाव होता है और शैतान के वास्ते से सुरक्षा प्रदान करता है।

यहां आयतुल कुर्सी का हिंदी में अनुवाद दिया गया है:

अल्लाहुल लाईल्लाहु अल हय्युल कय्यूमू।

ला तकुज्जूहू सिनतुं व ला नौम।

लहू मा फी समावाति व मा फील अर्दी।

मन ज़ल्जल लज़ी यशफ़’ऊ इंदहू इल्ला बइज्जती।

यालमू मा बयने आईदीहिम व मा खल्फहुम।

व ला यूहीतून बि शयईँ मिन इल्मिही इल्ला बि मा शांआ।

वसिआ कुर्सीयु हूसमावाति वाल अर्दा।

व ला यौदुहू हिफ्जुहुमा व हूल अलीयुल आजीम।

 

Ayatul Kursi Tarjuma In Hindi

आयतल कुर्सी तर्जुमा – अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह जिंदा है, दुनिया को कायम रखने वाला, ना उसको ऊघं दबा सकती है, ना नींद, उसी का है जो कुछ आसमानों और जो कुछ जमीन में है।
कौन है जो उसकी जनाब मैं बग़ैर उसकी इजाज़त के सिफारिश कर सके, वह जानता है। उनके तमाम हाज़िर व ग़ायब हालात को और उसकी मालूमात में से किसी भी चीज को अपने इल्म के एहाते में नहीं ला सकते।

यह आयत कई मुसलमानों के लिए बड़ा महत्व रखती है और इसे रोजाना पढ़ने का सलीका होता है। इससे उन्हें शैतान की बुराई से बचाव मिलता है और नफरत और बुराई के विचारों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा यह आयत जिसके साथ भी पढ़ी जाती है, उसको नेक और अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करती है

 

 

आयतुल कुर्सी हिंदी में

बिस्मिल्लाहिर राहमानिर राहीम

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहु – अल हय्युल कय्यूम – ला तै’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम – लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़-

मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इजनिह –  यअलमु मा बैना अयदी हिम वमा खल्फहुम – वला युहीतूना बिशय इम मिन

इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ – वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़ – वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्युल अज़ीम

 

 

आयतुल कुर्सी को कुरान में सबसे शक्तिशाली और लाभदायक वाक्यों में से एक माना जाता है। इसके कई लाभ माने जाते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. बुराई से सुरक्षा: आयतुल कुर्सी का पाठ बुराई और हानि से सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. यात्रा के दौरान सुरक्षा:  यात्रा शुरू करने से पहले आयतुल कुर्सी का पाठ करने से यात्रा के दौरान किसी भी हानि से सुरक्षित रहा जा सकता है।
  3. रात में सुरक्षा: सोने से पहले आयतुल कुर्सी का पाठ करने से रात के दौरान सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
  4. शैतान से सुरक्षा: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से शैतान के प्रभाव से सुरक्षित रहा जा सकता है।
  5. बच्चों के लिए सुरक्षा: अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए आयतुल कुर्सी का पाठ करते हैं।
  6. विश्वास में वृद्धि: आयतुल कुर्सी का नियमित पाठ करने से अल्लाह में विश्वास में वृद्धि होती है।
  7. इच्छाओं की पूर्ति: आयतुल कुर्सी का पाठ करन
  1. बीमारियों से निजात: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से शरीर की रोगों से रक्षा होती है।
  2. दुश्मनों से सुरक्षा: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से दुश्मनों से सुरक्षित रहा जा सकता है।
  3. सकारात्मक ऊर्जा: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
  4. अधिक ध्यान: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से ध्यान लगता है और मन कुछ समय तक शांत रहता है।
  5. संतुलित जीवन: आयतुल कुर्सी का नियमित पाठ करने से जीवन में संतुलितता और शांति होती है।
  6. दुःखों से मुक्ति: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से दुःखों से मुक्ति मिलती है।
  7. निरंतर उन्नति: आयतुल कुर्सी का नियमित पाठ करने से निरंतर उन्नति होती है।
  8. भूत-प्रेत से सुरक्षा: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से भूत-प्रेत से सुरक्षित रहा जा सकता है।
  9. शुभ फल: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से शुभ फल मिलता है।
  10. संतुलित मानसिकता: आयतुल कुर्सी का नियमित पाठ करने से मानसिक संतुलन होता है।
  1. धन-संपदा: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से धन-संपदा में वृद्धि होती है।
  2. भय-मुक्ति: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से भय-मुक्ति मिलती है।
  3. स्वस्थ शरीर: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से शरीर में स्वस्थता बनी रहती है।
  4. अच्छे सपने: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से अच्छे सपने आते हैं।
  5. विजय: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से विजय होती है।
  6. जीवन में सफलता: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से जीवन में सफलता मिलती है।
  7. पूजा का महत्व: आयतुल कुर्सी का पाठ करना पूजा का एक महत्वपूर्ण तरीका है और इससे पूजा की अर्थव्यवस्था सही तरीके से होती है।
  8. समस्त अशुभ दोषों से मुक्ति: आयतुल कुर्सी का पाठ करने से समस्त अशुभ दोषों से मुक्ति मिलती है।

यहाँ उपरोक्त सभी लाभ आयतुल कुर्सी के नियमित पाठ से प्राप्त होते हैं। आप आयतुल कुर्सी का पाठ करने से पहले इसका अर्थ समझ लें ताकि आपके मन में इसकी महिमा का अधिक अनुभव हो।

 

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आयतल कुर्सी हिंदी में | Ayatul Kursi-In Hindi
अस्सलामु अलइकुम व रहमतुल्लाह
नाज़रीन इस पोस्ट में हम आपके के लिए
Ayatul Kursi | Arabic | English | Hindi | Bangla, में तर्जमा के साथ पेश की गई है,

नोट:

मखारिज सही अदा न होने की वजह पर उलमा ए अहले सुन्नत क़ुरआन ए पाक या Ayatul Kursi को अरबी में पढ़ने का हुक्म देते है,
इसलिए तमाम उम्मत ए मुस्लिमा से गुजारिश है की कोशिश ये करे की क़ुरान ए पाक या Ayatul Kursi को अरबी में पढ़े
अगर किसी को कुरआन ए पाक या Ayatul Kursi नही पढ़ना आता है तो मजबूरन वो: पढ़े
लेकिन वो: याद करके किसी हाफिज ए कुरआन या का़री ए कुरआन को सुनाए ताकी
वो सही मखारिज के साथ आपको पढ़ा सके,

इस्लामिक सवाल जवाब / Islamic Sawal Jawab

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अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू, अल हय्युल क़य्यूम,
ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नउम,
लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़,
मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इज़निह,
यअलमु मा ब्इ’न अयदीहिम वमा खल्फहुम
वला युहीतूना बिशइ इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ
वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़,
वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्यिल आज़ीम,

ayatul kursi’meaning in hindi / आयतुल कुर्सी हिन्दी में तर्जमा
क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

Ayatul Kursi’benefits / आयतुल कुर्सी की फजीलत
(1) हदीस शरीफ़ में है कि यह आयत Ayatul Kursi कुरआन ए पाक की आयतों में बहुत ही अज़मत वाली आयत है,|

(2)हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब رضي الله عنه से रिवायत है ,
कि हुस्ने अख़्लाक़ के पैकर, नबियों के ताजवर, महबूबे रब्बे ﷻ हुजूर ﷺ ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर ! क्या
तुम्हें मालूम है कि कुरआने पाक की जो आयतें तुम्हें याद हैं उन मेँ कोनसी आयत अजीम है ?
मैंने अर्ज़ किया – अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल क़य्यूमु
फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने मेरे सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया ऐ अबू मुन्सिर तुम्हें इल्म मुबारक हो,|

(3) मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

(4) अमीरुल मुअमिनीन हज़रते अली رضي الله عنه फ़रमाते हैँ कि मैंने नूर के पैकर,
तमाम नबियों के सरवर, दो जहां के ताज़वर, हुजूर ﷺ को मिम्बर पर फ़रमाते हुए सुना
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढे उसे हैं ज़न्नत में दाखिल होने से मौत के सिवा
कोई चीज़ नहीं रोकती ! और जो कोई रात को सोते वक़्त इसे पढेगा ! अल्लाहु ﷻ उसे, उस के घर को
और उसके आस पास के घरों को महफूज फ़रमा देगा
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढेगा.
उस को हस्बे जैल बरकतें नसीब होंगी,|

(5) वोह मरने के बाद जन्नत में जाएगा ! इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(6) वोह शैतान और जिन की तमाम शरारतों से महफ़ूज़ रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(7) अगर मोहताज होगा तो चन्द दिनों मेँ उस की मोहताजी और ग़रीबी दूर हो जाएगी । इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(8) जो शख्स सुबह व शाम और बिस्तर पर लेटते वक़्त
आयतल कुर्सी Ayatul Kursi और इस के बाद की दो आयतें ख़ालिदून तक पढा करेगा वोह चोरी,
गर्क आबी (पानी में डूबने) और जलने से महफूज रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(9) अगर सारे मकान में किसी ऊंची जगह पर Ayatul Kursi लिख दी जाए
जिस पर हर किसी की नज़र पढ़ती हो इंशाअल्लाह ﷻ ! उस घर में कभी फ़ाक़ा न होगा बल्कि
रोजी में ब-र-कत और इज़ाफ़ा होगा ! औंर उस मकान में कभी चोर ना आएगा,,,

(10) हजरत माकल बिन यासर رضي الله عنه का बयान है कि
जो शख्स तीन बार Ayatul Kursi पढ़ता हो उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को
( मुकर्रर ) फरमा देगा. जो शाम तक उस पर रहमत भेजते रहेगें.
अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मरेगा.
जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी.
वह सुबह तक वह रहमत भेजते रहेगे |

सब से अफज़ल दुरूदे पाक हिन्दी में ?

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ
لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ
لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ
مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ
وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ
وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ
وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا
وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

Ayatul Kursi’meaning In Urdu
2.255
اللہ ہے جس کے سوا کوئی معبود نہیں وہ آپ زندہ اور اوروں
کا قائم رکھنے والا اسے نہ اونگھ آئے نہ نیند اسی کا ہے جو کچھ آسمانوں میں ہے
اور جو کچھ زمین میں وہ کون ہے جو اس کے یہاں سفارش کرے بغیر اس کے حکم کے جانتا ہے
جو کچھ ان کے آگے ہے اور جو کچھ ان کے پیچھے اور وہ نہیں پاتے
اس کے علم میں سے مگر جتنا وہ چاہے اس کی کرسی میں سمائے ہوئے
آسمان اور زمین اور اسے بھاری نہیں ان کی نگہبانی اور وہی ہے بلند بڑائی والا

क़यामत की निशानिया ; क़ुरआन ओर हदीस के हवाले के साथ

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আল্লা-হু লাইলা-হা ইল্লা-হুওয়া আল হাইয়ুল কাইয়ূমু লা-তা’
খুযুহূ ছিনাতুওঁ ওয়ালা-নাঊম লাহূ মা-ফিছ ছামা-ওয়া-তি ওয়ামা-ফিল আরদি মান যাল্লাযী ইয়াশফা‘
উ ‘ইনদাহূইল্লা-বিইযনিহী ইয়া‘
লামুমা-বাইনা আইদীহিম ওয়ামা-খালফাহুম ওয়ালা-ইউহীতূনা বিশাইইম মিন ‘
ইলমিহীইল্লা-বিমা-শাআ ওয়াছি‘
আ কুরছিইয়ুহুছ ছামা-ওয়া-তি ওয়াল আরদা ওয়ালা-ইয়াঊদুহু হিফজু হুমা-ওয়া হুওয়াল ‘
আলিইয়ূল ‘আজীম।

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2.255 আল্লাহ্‌ হন, যিনি ব্যতীত অন্য কোন উপাস্য নেই। তিনি নিজে জীবিত এবং
অন্যান্যাদের অধিষ্ঠিত রাখেন। তাঁকে না তন্দ্রা স্পর্শ করে, না নিদ্রা। তাঁরই, যা কিছু
আস্‌মানসমূহে রয়েছে এবং যা কিছু যমীনে। সে কে, যে তাঁর সম্মুখে সুপারিশ করবে,
তাঁর অনুমতি ব্যতিরেকে? (তিনি) জানেন যা কিছু তাদের সম্মুখে রয়েছে এবং যা কিছু তাদের
পেছনে। আর তারা পায়না তাঁর জ্ঞান থেকে, কিন্তু যতটুকু তিনি চান। তাঁর ‘কুরসী’
আস্‌মানসমূহ ও যমীন ব্যাপী এবং তাঁর জন্য ভারী নয় এগুলোর রক্ষণাবেক্ষণ। আর তিনিই হন উচ্চ,
মহা মর্যাদাসম্পন্ন।

5 वक़्त की नमाजों में कितनी कितनी रकअतें है जानिए- नमाज़ की नियत भी

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ayatul kursi english | text
Bismillahir-Rahmanir-Raheem,

Allahu La Ilaaha Illaa Huwal Haiyul Qayyoom;
Laa Ta’akhuzuhoo Sinatunw Wala Nawm;
Lahoo Maa Fis’samaawaati Wamaa Fil Arz;
Man Zallazee Yashfa’u ‘Inda’hooo Illaa Bi Iznih;
Ya’lamu Maa Baina Aideehim Wamaa Khalfahum;
Walaa Yuheetoona Beshai Im’min ‘Ilmihee Illa Bimaa Shaaa;
Wasi’a Kursiyyuhus Samaa-Waati Wal-Arz;
Wala Ya’ooduho Hifzuhumaa; Wa-Huwal ‘Aliyyul ‘Azeem,

FAQ.S
What is the meaning of Ayat Al-Kursi in English?
2.255: Allah-There Is No God Except Him;
He Is Alive (Eternally, On His Own)
And The Upholder (Keeps Others Established);
He Never Feels Drowsy Nor Does He Sleep;
To Him Only Belongs All Whatever Is In The Heavens
And All Whatever Is In The Earth;
Who Is He That Can Intercede* With Him Except By His Command?
He Knows What Is In Front Of Them And What Is Behind Them;
And They Do Not Achieve Anything Of His Knowledge
Except What He Wills; His Throne (Of Sovereignty)
Encompasses The Heavens And The Earth;
And It Is Not Difficult For Him To Guard Them;
And He Is The Supreme, The Greatest.
(This Verse Is Popularly Known As Ayat Al-Kursi.
It Has A Special Status And Reciting It Carries Great Reward.
*Prophet Mohammed Peace And Blessings Be Upon Him
Will Be The First One To Be Granted The Permission To
Intercede, Others Will Follow.)

अतल कुर्सी के मायने क्या है?
क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

आयतल कुर्सी कितने पारा में है?
सूरह ए ब’क़रह , पारा 3, आयत नंबर 255

अयातुल कुर्सी कौन सी आयत है?
सूरह ए ब’क़रह , पारा 3, आयत नंबर 255

अयातुल कुर्सी इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

 

आयतुल कुर्सी कुर्सी को इंग्लिश में क्या कहते हैं?
कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

आयतल कुर्सी के फायदे
(1) हदीस शरीफ़ में है कि यह आयत Ayatul Kursi कुरआन ए पाक की आयतों में बहुत ही अज़मत वाली आयत है,|
(2)हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब رضي الله عنه से रिवायत है ,
कि हुस्ने अख़्लाक़ के पैकर, नबियों के ताजवर, महबूबे रब्बे ﷻ हुजूर ﷺ ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर ! क्या
तुम्हें मालूम है कि कुरआने पाक की जो आयतें तुम्हें याद हैं उन मेँ कोनसी आयत अजीम है ?
मैंने अर्ज़ किया – अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल क़य्यूमु
फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने मेरे सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया ऐ अबू मुन्सिर तुम्हें इल्म मुबारक हो,|

(3) मुस्तदरक की एक रिवायत में है कि ‘सूरह ए बकरह में एक आयत है:
जो कुरआने पाक की तमाम आयतों की सरदार है ! वोह आयत जिस घर में पडी जाए
उस घर से शेतान निकल जाता है ! और वोह Ayatul Kursi है,|

(4) अमीरुल मुअमिनीन हज़रते अली رضي الله عنه फ़रमाते हैँ कि मैंने नूर के पैकर,
तमाम नबियों के सरवर, दो जहां के ताज़वर, हुजूर ﷺ को मिम्बर पर फ़रमाते हुए सुना
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढे उसे हैं ज़न्नत में दाखिल होने से मौत के सिवा
कोई चीज़ नहीं रोकती ! और जो कोई रात को सोते वक़्त इसे पढेगा ! अल्लाहु ﷻ उसे, उस के घर को
और उसके आस पास के घरों को महफूज फ़रमा देगा
जो शख्स हर नमाज़ के बाद Ayatul Kursi पढेगा.
उस को हस्बे जैल बरकतें नसीब होंगी,|

(5) वोह मरने के बाद जन्नत में जाएगा ! इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(6) वोह शैतान और जिन की तमाम शरारतों से महफ़ूज़ रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(7) अगर मोहताज होगा तो चन्द दिनों मेँ उस की मोहताजी और ग़रीबी दूर हो जाएगी । इंशाअल्लाह ﷻ ,,,

(8) जो शख्स सुबह व शाम और बिस्तर पर लेटते वक़्त
आयतल कुर्सी Ayatul Kursi और इस के बाद की दो आयतें ख़ालिदून तक पढा करेगा वोह चोरी,
गर्क आबी (पानी में डूबने) और जलने से महफूज रहेगा । इंशाअल्लाह ﷻ,,,

(9) अगर सारे मकान में किसी ऊंची जगह पर Ayatul Kursi लिख दी जाए
जिस पर हर किसी की नज़र पढ़ती हो इंशाअल्लाह ﷻ ! उस घर में कभी फ़ाक़ा न होगा बल्कि
रोजी में ब-र-कत और इज़ाफ़ा होगा ! औंर उस मकान में कभी चोर ना आएगा,,,

(10) हजरत माकल बिन यासर رضي الله عنه का बयान है कि
जो शख्स तीन बार Ayatul Kursi पढ़ता हो उस बंदे के लिए अल्लाह 70 हजार फरिश्तों को
( मुकर्रर ) फरमा देगा. जो शाम तक उस पर रहमत भेजते रहेगें.
अगर उस दिन वह शख्स मर जाता है तो शाहिद मरेगा.
जो शख्स शाम को यह अमल करेगा उसे भी 70 हजार फरिश्तों मुख्तार की जाएगी.
वह सुबह तक वह रहमत भेजते रहेगे |

आयतल कुर्सी का तर्जुमा हिंदी में
क़ुरान 2.255 अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (523फ) वह आप ज़िन्दा,
और औरों का क़ायम रखने वाला (524फ) उसे न ऊंघ आए न नींद (525फ)
उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (526फ) वह कौन है
जो उसके यहां सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (527फ) जानता है जो कुछ उनके आगे है
और जो कुछ उनके पीछे (528फ) और वो नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (529फ)
उसकी कुर्सी में समाए हुए है आसमान और ज़मीन (530फ) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी
और वही है बुलन्द बड़ाई वाला (531फ)

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