Mola Rotay Jatay Hain Lyrics

 

 

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहि राजेऊन

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहि राजेऊन

 

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

अब्बास के आंसू पोछते हैं शब्बीर को कुछ समझाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

सर देख के ज़ख्मी बाबा का जब बेटियां रोने लगती हैं

बच्चों को तसल्ली की खातिर ज़हरा का दर्द सुनाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

ज़ख्मी मौला की आंखों में ज़ख्मी मश्कीज़ा फ़िरता है

अब्बास-ए-जलीं के हाथों से क़ातिल को जाम पिलाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

हाय …

 

फिरता है निगाहों में मन्ज़र बाज़ारों का दरबारों का

कुछ देर को घर के आंगन में ज़ैनब को साथ चलाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

इक रोज़ इसी कूफ़े में तुम्हें बे पर्दा हरम को लाना है

आबिद को लगाकर सीने से बाज़ार का हाल सुनाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

भाई के साथ मेरी ज़ैनब जाएगी जहां जाने देना

ये तुमको वसीयत है मेरी अब्दुल्ला से फ़रमाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

सा’दात के रोने की जो सदा पर्दे से बाहर आती है

पहचान लो इन आवाज़ों को लोगों से कहते जाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

मालूम था इक दिन शानों में ज़ैनब के रसर बंध जाएगी

अरे शब्बर से कह के क़ातिल के हाथों से रसर खुलवाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

जब नजआ की हिचकी आती है ज़ैनब पे नज़र रुक जाती है

अल्लाह तुझे आबाद रखे होठों से दुआ फ़रमाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

पूछा है तकल्लुम ज़ैनब ने हैदर से ये आख़िरी सांसों में

क्यूँ बाज़ू देखे जाते हैं क्यूँ सर को चूमे जाते हैं

 

और मौला रोते जाते हैं

ज़ैनब का चेहरा देखते हैं और मौला रोते जाते हैं

 

Recited By: Mir Hasan Mir

Written By: Janab Mir Takallum Sb

 

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Mola Rotay Jatay Hain Lyrics English
Inna lillahi wa inna ilahi raji’un

Inna lillahi wa inna ilahi raji’un

 

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

Abbas ke aansu pochhte hain shabbir ko kuchh samjhate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Sar dekh ke zakhmi baba ka jab betiyan rone lagti hain

Bachchon ko tasalli ki khatir Zahra ka dard sunate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

 

Zakhmi mola ki aankhon me zakhmi mashkeeza firta hai

Abbas-e-jalin ke haathon se qatil ko jam pilate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Haye…

 

Firta hai nigahon me manzar bazaron ka darbaron ka

Kuchh der ko ghar ke aangan me zainab ko saath chalate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Ik roz isi koofe me tumhe be parda haram ko lana hai

Aabid ko laga kar seene se bazaar ka haal sunate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Bhai ke saath meri zainab jayegi jahan jane dena

Ye tumko wasiyat hai meri Abdullah se farmate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Sa’daat ke rone ki jo sada parde se bahar aati hai

Pahchan lo in aawazon ko logon se kahte jaate hain

 

Aur mola rote jate hain

Zainab ka chehra dekhte hain aur mola rote jaate hain

 

Maloom tha ik din shanon me zainab ke rasar bandh jayegi

Are shabbir se kah ke qatil ke haathon se rasar khulwate hain

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