Insan ek khilouna chand qadri lyrics

 

जिस्म की मिलकियत पे नाज़ न कर
जिस्म तो एक रोज़ फ़ानी है
ख़ाक़ हो जायेगा ये जिस्म ओ सबाव
इसकी बस इतनी सी कहानी है

ओ माटी के पुतले सुन ले

सुन ले, सुन ले, सुन ले, सुन ले
सुन ले, सुन ले, सुन ले, सुन ले

सुन-सुन-सुन-सुन

ओ माटी के पुतले सुन ले ये तन पड़ेगा खोना

ये मिट्टी, मिट्टी में मिलेगी
ये मिट्टी, मिट्टी में मिलेगी

ये एक दिन है होना
इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

है ये हक़ीक़त झूठ नहीं है सुन लो दुनिया वालो
लिखा हुआ है कुरआं में ये पढ़ लो दुनिया वालो

ऐसा करिश्मा दिखाया रब हिकमत और हुनर का
पानी मिट्टी आग हवा से पुतला बनाया बशर का

उस पुतले में रुह डालकर रब ने लिया रह़मत में
दे कर के हर इक आराइश उसे रखा जन्नत में

एक ज़रा सी भूल हुई तो ख़ुल्द से उसे निकाला
भेजा ज़मी पे बना के उसको पल-पल रोने वाला

कभी गिला शिकवा ना किया कैसी भी मुसीबत आई
चलता गया पीछे ना हटा वो जब भी ठोकर खाई

रोटी की ख़ातिर की मुशक्कत हर शैय ने देखा है

हर शैय ने देखा है
हर शैय ने देखा है

तब से लेकर आज तलक भी मेहनत ये करता है
बोझ ग़मों का क़दम-क़दम पे, इसको पड़ा है ढोना

इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

खो गया इसमें आकर, इसमे देखा जब ये मेला
निकल ना पाया रह गया फंस कर ये है ऐसा झमेला

मां की कोख़ से होकर पैदा जब ये पाये बचपन
पाये कोई फुटपाथ तो कोई पाये घर का आंगन

किसी को मिल जाता है यारों मखमली, रेशमी बिस्तर
किसी की क़िसमत से मिलते हैं मिट्टी कंकर पत्थर

हो जब ख़त्म वो बचपन के दिन और जब आये जवानी
और भी मुश्किल हो जाती है इंसा तेरी कहानी

कोई दुनिया में बनता है अच्छी क़िस्मत वाला
पेट भरे कोई भीक मांगकर फूटी क़िस्मत वाला

कोई पाये इस दुनियां में गाड़ी दफ़्तर बंगला
सर्दी तक के मौसम में भी रहता कोई नंगा

मिले नहीं पीतल भी किसी को, पाता है कोई सुन ना

इंसांं एक खिलौना … खिलौना
इंसांं एक खिलौना … खिलौना

बाद जवानी के इंसां पर जब के बुढ़ापा आए
नई पुरानी दुख बीमारी को ये साथ में लाए

जब के इसने देखा अपनी उम्र का ढलता दर्पण
लगे कांपने हाथ और पांव देखी हिल्ती गर्दन

जिसके पास है देखो दौलत ग़ैर भी उसके अपने
खाली जो है उसके ऊपर लगते हैं सब हंसने

किसी का खून तो धन के लालच में ख़िदमत करता है
जिसके पास नहीं कुछ उसको कोई नहीं भरता है

होता है इस दुनिया में ऐसा भी क़िस्सा निराला
कड़ी धूप में खड़ा है देखो पेड़ लगाने वाला

किसी को आख़री मंज़िल तक ले जाएं अपने-पराए
और किसी को कांधा देने अपना एक ना आए

किसी को अपने मर मिटने पर खुद पड़ता है रोना

इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

इंसां ये शैतान से बढ़कर काम सियाह करता है
दुनिया में इंसान न जाने कितने गुनाह करता है

नफ़्स की ख़ातिर करता है ये किसी के तन का सौदा
दुनिया है बाज़ार ए हवस होता है वदन का सौदा

झूठी बात पे अल्लाह नबी की झूठी क़सम ये खाए
दौलत की ख़ातिर भाई, भाई का खून बहाए

चंद सिक्कों की ख़ातिर बेचे ये अपने ईमां को
बेचता है ताबीज़ बनाकर आयात ए कुरआं को

दीनी मदरसों दरगाहों से चलाए ये अपना धंधा
बैठा मस्जिद में बनकर ये नेक खुदा का बंदा

सब है दिखावा सच्चे दिल से तौबा नहीं करता है
हो गया ये शैतान से बढ़कर रब से नहीं डरता है

कब समझेगा मिट जाएगा इसका जादू टोना

इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

ऐसे ऐसे इस दुनिया में देखो हुए हैं पैदा
जो चाहते थे ज़ाते ख़ुदा पर कोई नहीं हो शैदा

शाम सवेरे दर पे आके दुनिया करे सलामी
वोह चाहते थे हर इक इंसां करे हमारी ग़ुलामी

बस्ती बस्ती गांव गांव में चर्चा खुदा होने का
बनके कोई फिरऔन है करता दावा खुदा होने का

और कहता है अपनी हिकमत से बादल लाता हूं
मैं हूं खुदा तुम सबका ठहरो पानी बरसाता हूं

रब की ज़ात मिटाने को कोई तीर हवा में चलाए
दुनिया की नज़रों में नादां झूठी शान दिखाएं

कोई इस दुनिया में आकर बनबाता है जन्नत
शान ए खुदा को भूला है, बेअक़ल की देखो हिम्मत

भूल गया के क़ब्र में इसका ख़ाक़ का होगा बिछौना

इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

जबके किसी पर इस दुनिया का शाही नशा छाता है
कलमा गो होकर के भी ज़ालिम वो हो जाता है

किसी के मारे बर्छी किसी मासूम पे तीर चलाए
मारे किसी सीने पे नेज़ा और ये ख़ैमें जलाए

ज़ुल्म का हो जाता है जब दुनिया में भारी तराज़ू
छीने विदा ये किसी के सर से किसी के काटे वाज़ू

क़त्ल किया था कर्बोबला में नबी का प्यारा नवासा
हुसैन इब्ने अली को रक्खा तीन रोज़ तक प्यासा

और इसी ने बंद किया था आले नबी का पानी
सद अफ़सोस के इंसां होकर काम किया शैतानी

भूल गया था मौत आएगी एक दिन मिटना होगा
क़ब्र की मिट्टी तले भी तुझको इक दिन दबना होगा

ओ महलों में रहने वाले क़ब्र में होगा सोना

इंसा एक खिलौना … खिलौना
इंसा एक खिलौना … खिलौना

Qawwal: Chand Afzal Qadri Chishti

Lyricist: Anwar Gujrati, Naseem Nagpuri

इंसां एक खिलौना कव्वाली Sung By chand qadri

इंसां एक खिलौना कव्वाली

इंसां एक खिलौना कव्वाली

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